इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907
बुधवार, 20 फ़रवरी 2013
!! इस तरह के चित्र में आप क्या देखते है ?
!! इसे क्या कहते है ?
कामना पूरी न होगी, ..... भावना बढती रहेगी !
चक्र चलता ही रहेगा,..... विश्व गलता ही रहेगा !!
क्या इसे संसार कहते ?
आस मिटती ही रहेगी,.....श्वास घुटती ही रहेगी !
... आयु नित घटती रहेगी,..मृत्यु हंसती ही रहेगी !!
क्या इसे व्यापार कहते ?
लौ मचलती ही रहेगी,.. शलभ को डसती रहेगी !
निशा घुलकर सुबह होगी, शाम ढलती ही रहेगी !!
क्या इसे दिन-रात कहते ?
घन घटायें घुल गिरेंगी, अवनि प्यासी ही रहेगी !
दामिनी दमका करेगी,. विरहणी व्याकुल रहेगी !!
क्या इसे अभिशाप कहते ?
पतन होता ही रहेगा,......प्रगति पंखों से उड़ेगी !
जन्म होता ही रहेगा,.... लाश धू-धू ही जलेगी !!
क्या इसे अमरत्व कहते ?
प्रेम छलता ही रहेगा,..... वासना जलती रहेगी !
नयन रोते ही रहेंगे,..... नीर सरिता बन बहेगा !!
क्या इसे संताप कहते ?
'चन्द्र' छिपता ही रहेगा,.......चांदनी ढूँढा करेगी !
प्यास पपिहा की न बुझेगी, स्वाति झरती ही रहेगी !!
क्या इसे अभिमान कहते ?
चक्र चलता ही रहेगा,..... विश्व गलता ही रहेगा !!
क्या इसे संसार कहते ?
आस मिटती ही रहेगी,.....श्वास घुटती ही रहेगी !
... आयु नित घटती रहेगी,..मृत्यु हंसती ही रहेगी !!
क्या इसे व्यापार कहते ?
लौ मचलती ही रहेगी,.. शलभ को डसती रहेगी !
निशा घुलकर सुबह होगी, शाम ढलती ही रहेगी !!
क्या इसे दिन-रात कहते ?
घन घटायें घुल गिरेंगी, अवनि प्यासी ही रहेगी !
दामिनी दमका करेगी,. विरहणी व्याकुल रहेगी !!
क्या इसे अभिशाप कहते ?
पतन होता ही रहेगा,......प्रगति पंखों से उड़ेगी !
जन्म होता ही रहेगा,.... लाश धू-धू ही जलेगी !!
क्या इसे अमरत्व कहते ?
प्रेम छलता ही रहेगा,..... वासना जलती रहेगी !
नयन रोते ही रहेंगे,..... नीर सरिता बन बहेगा !!
क्या इसे संताप कहते ?
'चन्द्र' छिपता ही रहेगा,.......चांदनी ढूँढा करेगी !
प्यास पपिहा की न बुझेगी, स्वाति झरती ही रहेगी !!
क्या इसे अभिमान कहते ?
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