मंगलवार, 26 मई 2026

आल्हा ऊदल बनाफर क्षत्रिय हैं


कुषाणौ का तीसरा काल , भारत की राजधानी पेशावर । राजा कनिष्क , राज्य विस्तार ,मध्य एशिया में तजैकिस्तान से लेकर भारत में उडीसा तक, अफगानिस्तान से लेकर चीन में कांशू तक । शांति व्यवस्था के लिये जो प्रमुख राजपाल उत्ररदाई था उसका नाम था….वनाफर ।

इसी वनाफर का वंसज सैकडौ वर्षो के बाद महोवा मे देवतुल्य साधू के रूप में मनियां देव नाम से प्रसिद्ध हुआ । इस मनीदेव का वंसज हंसराज चंदेल वंसीय कालिंजर के राजा कीरतदेव की सेना में बडे पद पर पहुँच गया । शकसंवत 1068 में हंसराज के दोनौ बेटा दक्षराज व बक्षराज कीरत देव की सेना में भर्ती हो गये । जब कीरत देव ने अपनी राजधानी चंदेरी को बनाया तब दक्षराज और बक्षराज को सेनापति का औहदा दे दिया ।

कीरत देव का बेटा परिमारदेव (परिमाल) जब राजा बना तब उसने अपनी राजधानी महोवा को बनाया ।

हंसराज के दो बेटा— दक्षराज और बक्षराज

दक्षराज के तीन बेटा- आल्हा , ऊदल और दासीपुत्र धांदू

बक्षराज के दो बेटा — मलिखान और सुलिखान

आल्हा का बेटा - इंदल

मलिखान का बेटा - वहोरन ( इल्तुतमिश)

उस समय दक्षराज ने महोबा के बनाफर क्षत्रिय आल्हा ऊदल की सेना का नाम भी वनाफर रख दिया था। आल्हा ऊदल की सेना में कुछ अन्य जातियों ने भी उनका साथ दिया था। इसके कारण भारत में कई अन्य जातियों के लोग भी जो वर्तमान में खुद को राजपूत नहीं मानते लेकिन, उन्होंने अपने आपको बनाफर लिखना या कहना शुरू कर दिया था। इसलिए आल्हा ऊदल के साथ-साथ महोबा के सभी सैनिक वनाफर कहलाने लगे।

माँ शारदा के अनन्य भक्त महापराक्रमी वीर शिरोमणि राजपूत योद्धा आल्हा जी की जयंती पर कोटिशः नमन।🙏
 बड़े लडैया महोबा बाले इनकी मार सही न जाए। एक को मारे दुई मर जाए तीसरा ख़ौफ़ खाय मर जाए ".