रविवार, 16 मई 2021

कोरोना वैक्सीन एक्सपोर्ट की सच्चाई क्या है ??

वैक्सीन एक्सपोर्ट की सच्चाई जानेंगे तो सारे जिहादियों और सेकुलरों का सिर शर्म से झुक जाएगा...जिहादी और सेकुलर लगातार एक मुद्दा उठा रहे हैं...साथ ही ये पोस्टर लगा रहे हैं कि हमारे बच्चों की वैक्सीन दुनिया में क्यों एक्सपोर्ट कर दी? 
कितनी वैक्सीन कहाँ भेजी गई और क्यों भेजी गई? इसका पूरा हिसाब किताब इस लेख में है। 
और, साथ ही ये भी बताएंगे कि कैसे भारत के जिहादियों को सऊदी अरब में फ्री वैक्सीन की डोज का मजा मिल रहा है। 

- 11 मई तक भारत ने कुल 6.6 करोड़ वैक्सीन के डोज विदेशों में निर्यात किए हैं । इसमें से 84 प्रतिशत यानी करीब 5 करोड़ वैक्सीन लाइबेलिटी के तहत बाहर भेजी गई है । लाइबेलिटी मतलब भारतीय कंपनी के द्वारा विदेशी कंपनी या दूसरे देश के साथ हुए समझौते के तहत वैक्सीन को बाहर भेजा गया है । अगर भारत की कंपनी वैक्सीन बाहर भेजने का समझौता स्वीकार नहीं करती तो भारतीय कंपनियों को वैक्सीन बनाने का कच्चा माल ही नहीं मिलता ।

- भारत में जो कंपनी वैक्सीन बनाती है वो वैक्सीन बनाने का कच्चा माल विदेशों से इम्पोर्ट करती है । जिन देशों ने भारत की कंपनियो को ये कच्चा माल दिया । उन देशों ने भारत की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से करार किया कि हम आपको कच्चा माल तभी देंगे जब आप वैक्सीन बनाने के बाद कुछ प्रतिशत हमको भी बेचेंगे । इस वैक्सीन के लिए भारतीय कंपनियों को पेमेंट भी दी गई है । लगभग 5 करोड़ वैक्सीन ऐसे ही कुछ अनुबंधों के तहत विदेशों में भेजना भारत की कंपनियों की व्यवसायिक जिम्मेदारी थी । इसके अलावा एक करोड़ 7 लाख वैक्सीन मदद के रूप में भारत के पड़ोसी देशों को भेजी गई है । इसकी जरूरत क्यों पड़ी ? आगे बताएंगे । 

- आपको ये बात जानकार आश्चर्य होगा कि आज बहुत सारे जिहादी और इस्लाम परस्त सेकुलर भी वैक्सीन एक्सपोर्ट को लेकर भारत सरकार को घेर रहे हैं । लेकिन सच्चाई ये है कि भारत की कंपनियों ने कुल एक्सपोर्ट हुई वैक्सीन का 12.5 प्रतिशत सऊदी अरब को एक्सपोर्ट किया है । सऊदी अरब में 15 लाख 40 हजार भारतीय रहते हैं और ये बताने की जरूरत नहीं है कि इनमें से 90 प्रतिशत मुसलमान हैं जिहादी हैं । भारत ने यहां से जो वैक्सीन सऊदी अरब को एक्सपोर्ट की है । वो सारी वैक्सीन सऊदी अरब में रहने वाले इन हिंदुस्तानी जिहादियों को मुफ्त में लगाई जा रही है । आप सोचिए कितने शर्म की बात है कि जिहादियों को वैक्सीन फ्री में ठोंकी जा रही है फिर भी भारत में मोजूद जिहादी हल्ला हंगामा काट रहे हैं क्योंकि मकसद सिर्फ मोदी का विरोध है । 

- भारत ने 2 लाख वैक्सीन डोज युनाइटेड नेशन पीस कीपिंग फोर्स को दिया है । भारत के बाहर भी भारत के हजारों जवान संयुक्त राष्ट्र के मिशन के तहत शांति सेना के रूप में नियुक्त हैं । इन हजारों जवानों को भी वैक्सीन लगाने के लिए वैक्सीन एक्सपोर्ट की गई है । अब जिहादी जवाब दें कि क्या वैक्सीन भारत के सैनिकों और जवानो को लगे तो उन्हें कोई दिक्कत है ? 

-इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक कोवैक्स फैसेलिटी का निर्माण किया है । भारत सरकार को WHO के इस कोवैक्सीन फैसेलिटी को कुल एक्सपोर्ट वैक्सीन का 30 प्रतिशत भेजना पड़ा । ये दुनिया की मदद के लिए किया गया एक समझौता था जिस पर हर देश के साइन हैं । अगर आज मोदी के अलावा कांग्रेस का भी प्रधानमंत्री होता तो भी उसको ये वैक्सीन WHO को भेजना ही पड़ता । 

- कमर्शियल लाइसेंसिंग क्या होती है ? इस बात को आप ऑक्सफोर्ड और सीरम की वैक्सीन कोविशील्ड से भी समझ सकते हैं । दरअसल सीरम भारत की कंपनी है जो वैक्सीन बनाती है । लेकिन उसने लाइसेंस और फॉर्मूला ब्रिटेन की कंपनी एक्स्ट्राजेनेका (ऑक्सफोर्ड) का लिया हुआ है । पहले ऑक्सफोर्ड ने भारतीय कंपनी सीरम से बिलकुल साफ कहा था कि हम आपको लाइसेंस तभी देंगे जब आप हर महीने हमें 50 लाख वैक्सीन बनाकर देंगे । तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ब्रिटेन की सरकार से बात करके इस रुकावट को दूर किया और सीरम को लाइसेंस मिला नहीं तो कोवीशील्ड वैक्सीन तो भारत में बन ही नहीं पाती ।

- इसके अलावा भारत सरकार ने 7 पड़ोसी देशों को भी वैक्सीन भेजी है । ये सारे पड़ोसी देश लगातार चीन के प्रभाव में आते जा रहे हैं । अगर यहां भारत ने वैक्सीन नहीं भेजी होती तो चीन इन देशों पर और ज्यादा प्रभाव जमा लेता । इसलिए भारत ने बांग्लादेश भूटान श्रीलंका अफगानिस्तान वगैरह को वैक्सीन भेजी है । अब जैसे उदाहरण के लिए समझिए... चीन ने बांग्लादेश को अपनी वैक्सीन ऑफर की लेकिन बांग्लादेश ने मना कर दिया और भारत का हाथ पकड़ा । लेकिन अब जरा विचार कीजिए कि जो चीन पाकिस्तान से हर चीज की कीमत वसूल रहा है उसी चीन को आखिरकार मजबूरी में बांग्लादेश को फ्री वैक्सीन गिफ्ट के तौर पर भी ऑफर करनी पड़ी । सोचिए वैक्सीन के नाम पर इतनी बडी कूटनीति चल रही है । दरअसल भारत को भी ये कूटनीति करनी पड़ती है आप अपनी सीमा पर हर तरफ दुश्मनी मोल नहीं ले सकते हैं ।

- कुछ लोग ये अफवाह भी उड़ा रहे हैं कि भारत सरकार ने पाकिस्तान को वैक्सीन भेज दी है ये बात बिलकुल गलत है । दरअसल सच्चाई ये है कि कोवीशील्ड बनाने वाली ब्रिटेन की कंपनी एक्सट्राजेनेका से पाकिस्तान सरकार का समझौता हुआ है उसी के तहत  वैक्सीन डोज पाकिस्तान भी भेजे गए हैं । लेकिन इसमें भारत सरकार और किसी भी भारतीय कंपनी का कोई रोल नहीं है 

- और सबसे बड़ी बात ये है कि वैक्सीन का एक्सपोर्ट फर्स्ट वेव के बाद किया गया था जब हमारे देश में लोग वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार ही नहीं थे और सारे के सारे विपक्षी नेता वैक्सीन की क्वालिटी पर ही सवाल खड़े कर रहे थे । 

- तो आप सभी लोगों से हमारी ये अपील है कि संकट के इस समय में भ्रम मत फैलने दीजिए और भ्रम फैलाने वालों को इस पोस्ट से करारा जवाब दीजिए ।

शनिवार, 15 मई 2021

नन बनते समय लडकियाँ क्या शपथ लेती हैं ?

शौंक़िया तौर पर मैं  एक प्रसिद्ध चर्च  चला गया ! मुझे भी जरा कुछ ज्यादा ही आनन्द आता है धर्म पर चर्चा में और वहाँ उनकी प्रार्थना एवं अन्य कुछ बातों में अपनी रूची दिखानी शुरु की । वहां एक ईसाई... जो कि.. वेश-भूषा से कोई फादर टाईप ही लग रहा था..., मेरे गले मे जनेऊ देख कर समझ गया कि... मैं एक हिन्दू हूँ...! इसीलिये.... उसने मुझे भी ईसाई बनाने और शीशे में उतारने के लिए कहा कि.देखो बेटे... बुरा मत मानना... लेकिन दरअसल. सच पूछो तो... हिन्दू धर्म और इस्कॉन पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाना चाहिये.।

क्योंकि.यह श्रीकृष्ण को महिमा मंडित करते हैं जबकि श्रीकृष्ण ने 16108 विवाह किये थे
जिससे सिद्ध होता है कि श्रीकृष्ण एक चरित्रहीन व्यक्ति थे...! इसीलिये. यीशु ही तुम्हे सही राह दिखा सकते हैं...! उसकी... बातें सुनते ही मेरे तन-बदन में आग लग गयी परन्तु... ऊपरी तौर पर... मैंने उसे बहुत ही शांतचित्त से बोला...

देखिये पादरी जी मैं आपको अपना फादर तो बोल नहीं सकता. क्योंकि.मैं कोई सेक्यूलर नहीं बल्कि सनातनी हूँ, और...हिन्दुओं का एक ही बाप होता है... आप ईसाईयों की तरह हर चर्च में हमारे बाप यानि कि फादर नहीं होते हैं. और, जहाँ तक रह गयी बात भगवान कृष्ण की शादियों की.तो.आप सिर्फ मुझे इतना बता दो कि.।

आपके इस कथित रूप से पवित्र ईसाई धर्म में... नन बनते समय लडकियाँ क्या शपथ लेती है..?
मेरे इतना कहते ही वो मेरा मुंह देखने लगा... परन्तु कुछ नहीं बोला....! मैंने उससे दो तीन बार वही सवाल पूछे... परन्तु वो चुप रहा...!

अंततः मैंने उससे कहा...
कोई बात नहीं पादरी जी मैं बता देता हूँ पूरे विश्व में नन बनते समय कुंवारी लडकियाँ यह शपथ लेती है कि"मै जीजस को अपना पति स्वीकार करती हूँ और उनके अलावा किसी अन्य पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाऊँगी"

तो कृपया. अब आप मुझे बतायें कि आज से पहले कितनी लाख ननों ने जीसस से विवाह किया और भविष्य में भी ना जाने कितनी ननें विवाह करेंगी..!
तो.आपकी बात को आप पर ही लागू करते हुये... क्यों ना, सबसे पहले पूरे विश्व में ईसाईयों और ईसाई धर्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाये.।

उसके बाद वो पादरी मुझे कुछ नहीं बोला और चुप-चाप सर झुका कर मेरे पास से चला गया.।

तो पूरी कहानी का सार यह है कि सिर्फ खुद के ही घर को जानना पर्याप्त नहीं होता है.अडोस-पड़ोस की जानकारी भी रखा करें.ताकि लोगों को मुंह तोड़ जवाब दिया जा सके.।