मंगलवार, 28 जनवरी 2014

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और धारा 370(आरएसएस की मुस्लिम साखा)

आठ दशकों से भी अधिक समय से राष्ट्रीय हित में कार्यरत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने विरुद्ध किए जाने वाले तमाम दुष्प्रचार के बाद भी राष्ट्र-निर्माण के अपने कार्य में लगा हुआ है | इसी का एक अनुपम उदाहरण सामने आया है आतंकवाद के साये में जी रहे मुस्लिम बहुल कश्मीर के सन्दर्भ में | ज्ञात हो कि संघ से १९५९ से (५२ वर्षों से) जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता इन्द्रेश कुमार ने कुछ वर्षों पहले घाटी के मुस्लिमों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना की थी | इन्द्रेश कुमार पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में सर्वाधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए थे परन्तु १० वर्ष की आयु से ही संघ से जुड़े होने के कारण उनका राष्ट्र-निर्माण में ही स्वयं को समर्पित करने का मन था | उनके घोर साहस एवं सपर्पित कर्मयोग का परिणाम तब भी सामने आया था जब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने लगभग १० लाख मुस्लिम लोगों के हस्ताक्षर  गो-हत्या के विरोध में करवा के दिखलाये | मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय एकीकरण के इतने बड़े प्रयास को मीडिया ने कभी दिखाने का प्रयास नहीं किया | यदि कभी दिखलाया भी तो इस रूप में जैसे संघ भी तथाकथित राजनैतिक दलों की तरह तुष्टिकरण के खेल खेल रहा है | यहाँ तक कि राष्ट्र को जोड़ने के इस यज्ञ की सफलता से घबराए सत्ताधारी राजनैतिक गठबंधन की सरकार ने मक्का मस्जिद धमाकों के सिलसिले में सीबीआई को भी इन्द्रेश कुमार के पीछे लगा दिया | परन्तु संघ के प्रत्यक्ष योगदान से एवं इन्द्रेश कुमार के सतत प्रयासों से बने इस संगठन का चमत्कार अब छुपाये नहीं छुप रहा |
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच विगत ३ माह से “हम हिन्दुस्तानी, कश्मीर हिंदुस्तान का”, नाम से एक सशक्त अभियान चलाये हुए था | इस अभियान के अंतर्गत राष्ट्रवादी मुस्लिमों से मस्जिदों में प्रार्थनाएं की, व्याख्यान आयोजित किए एवं देश भर में सभाएं की | अभियान का समापन इस रविवार को दिल्ली में हुआ जिसमें इतनी सर्दी के बाद भी देश के २३ राज्यों के १७५ जनपदों से आये १० हज़ार राष्ट्रवादी मुस्लिमों ने भाग लिया | समापन समारोह में कश्मीर को शेष भारत से अलग संविधान देने वाली धारा ३७० को स्थायी रूप से समाप्त करने, कश्मीरी युवाओं को रोजगार दिलवाने, एवं पाकिस्तान एवं चीन द्वारा हड़प लिए गए कश्मीर के भूभागों को वापस लेने की मांगें उन १० हज़ार मुस्लिमों द्वारा एक स्वर में उठायी गयी |
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In Eng : RSS' Magic - Kashmiri Muslims call for revoking article 370, taking
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चर्चा का प्रारंभ श्रीनगर के मुहम्मद फारूक ने किया | उन्होंने स्पष्ट कहा कि कश्मीर समस्या की जद धारा ३७० ही है और इसे यथाशीघ्र हटाया जाना चाहिए | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ही नहीं, घाटी के आम मुस्लिम भी यही चाहते हैं | उन्होंने सीधे सीधे शेख अब्दुल्ला और जवाहरलाल नेहरु को कश्मीर समस्या के लिए उत्तरदायी ठहराया |
बारामूला से आये मुश्ताक अहमद पीर ने कहा कि अलगाववाद की राजनीति करने से या लाल चौक पर तिरंगा लहर देने से कश्मीर कि समस्याएं हल नहीं होंगी एवं उसके लिए राज्य की प्रगति में बाधक कारणों के उन्मूलन की आवश्यकता है | बशीर अहमद, जिन्होंने अपना मत “भारत माँ की जय” के नारे के साथ देना आरम्भ किया, उन्होंने कहा कि कश्मीर के विस्थापितों को ६ दशक से मत डालने तक का अधिकार नहीं है जो उन्हें मिलना चाहिए | इंजिनियर गुलाम अली जो बक्करवाल समाज से आते हैं, उन्होंने भी शेख अब्दुल्लाह और नेहरु को ही कश्मीर समस्या का दोषी माना | उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर के राजनैतिक दलों ने जम्मू के निवासियों के साथ अन्याय किया है | उन्होंने ये भी कहा कि धारा ३७० कुछ स्वार्थी नेताओं के हाथ का खिलौना रही है और इसने कभी जनता का भला नहीं किया | गुलाम अली ने भारतीय संसद को पाकिस्तान और चीन से अपना कश्मीर वापस लेने की उसकी वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा को पूरा करने को भी कहा |
कश्मीर से आई हालिमा ने आम लोगों की आर्थिक दशा सुधारने वाले प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया | नजीर मीर, जिन्होंने आतंकवाद में अपने तीन भाई गँवा दिए, उन्होंने आजादी की मांग की भर्त्सना करते हुए कहा कि जब हम पहले ही आज़ाद है तो ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य रह जाता है? मुफ्ती मौलाना अब्दू सामी ने हसरत मोहानी, आंबेडकर एवं रफ़ी अहमद किदवई का नाम लेकर कहा कि ये लोग भी ३७० के विरोध में थे परन्तु नेहरु की जिद के कारण ३७० आई और कश्मीरियों का जीवन बर्बाद कर गयी | तब से अब तक सभी राजनैतिक दलों ने इसका दुरूपयोग भारत के विरोध में ही किया है | उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की प्रशंसा की और भरोसा दिलाया कि उनका संगठन इन्द्रेश कुमार के नेतृत्व में काम करता रहेगा |
जमात-ए-हिंद के अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि यह अभियान राष्ट्र हित में चलाया गया क्योंकि भारत के सीमावर्ती भागों में स्वाधीनता के इतने वर्ष बाद भी स्थितियाँ विकट हैं | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पहला मुस्लिम संगठन है जिसने सीमा सुरक्षा का विषय उठाया है | बंगलूरू से आये अब्बास अली बोहरा ने कहा कि दक्षिण भारत के मुस्लिम कश्मीर के राष्ट्रवादी मुस्लिमों के साथ हैं |
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छत्तीसगढ़ हज समिति के सभापति डॉ. सलीम राज ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिमों को बदनाम करवाया है | भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष तनवीर अहमद ने कश्मीर समस्या का इतिहास लोगों को स्मरण करवाया | उन्होंने कहा कि जब महाराज हरि सिंह ने २६ अक्टूबर १९४७ को विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए तो कश्मीर का भारत में विलय पूर्ण एवं अंतिम था परन्तु नेहरु की हठधर्मिता एवं एकतरफा युद्धविराम और मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के कारण ये समस्या अस्तित्व में आई | उन्होंने रफ़ी अहमद किदवई के कथन का स्मरण करवाया कि कांग्रेस ने कश्मीर की सभ्यता नष्ट कर देने का काम किया है |
दिल्ली के इमरान इस्माइल ने कहा कि वो इन्द्रेश कुमार ही थे जिन्होंने कश्मीरी विधवाओं की विनती पर ७२४ सिलाई मशीनें कश्मीर भिजवाई थी | भूकंप के समय भी उन्होंने ही पीड़ितों को सहायता उपलब्ध करवाई थी जबकि एक भी मुस्लिम नेता सहायता करने आगे नहीं आया था | इमरान ने कड़े शब्दों में इन्द्रेश कुमार को आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने के कांग्रेसी हथकंडों की निंदा की और कहा कि ये लोग भारत के मुस्लिमों को संघ के विरूद्ध भड़काते हैं ताकि डरा दिखा कर वोट लिए जा सकें |
भाजपा के डॉ. डी के जैन ने कहा कि कश्मीर की स्वायत्तता की मांग निराधार है | कांग्रेस और दूसरे दल झूठ पे झूठ फैला कर देश को बांटने के षड़यंत्र कर रहे हैं और संदेह का माहौल देश में पैदा कर रहे हैं | इन्द्रेश कुमार जो कोहरे के कारण ट्रेन के देरी से चलने के कारण सभा में नहीं पहुच पाए, उन्होंने मोबाइल फोन से अपना संबोधन दिया | उन्होंने कहा कि सरकार निर्दोषों को आतंकवादी बनाने का कुत्सित खेल खेल रही है और भारत विरोधी तत्त्व एवं राजनैतिक दल कश्मीर के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच शान्ति, सौहार्द एवं आपसी सद्भाव से भरपूर भारत के निर्माण का सात्विक प्रयास है और उन्हें विश्वास है कि यह अवश्य सफल होगा |
एक ओर तमाम तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए मुस्लिम समाज को वोट बैंक मान कर उन्हें आरक्षण की अफीम पिलाने में जुटे हैं ताकि समाज को धर्म के नाम पर बाँट सकें | तथाकथित पिछडों के अधिकार की बात करने वाले जातियों में समाज को पहले ही बाँट चुके हैं | वही दूसरी ओर हिंदू-मुस्लिम का भेद मिटा कर मुस्लिमों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास में एवं जातियों के भेद मिटा कर हिंदू समाज को एक करने में लगे संघ के संगठन जुटे हुए हैं | जो लोग संघ के स्वयंसेवकों से परिचित हैं, अथवा संघ की पचासों अनुसांघिक संस्थाओं में से किसी से जुड़ कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं, उनके लिए संघ सम्मान का विषय है | कितनी ही बड़ी संख्या में परिवार होंगे जिनके बच्चे संघ के विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं |
सच्चाई दिखलाना मीडिया का काम होता है, परन्तु जब मीडिया स्वयं कोयले की दलाली में (नीरा राडिया के टेपों में) मुँह काला कर चुका हो, तो राष्ट्रवादी मीडिया की कमी जनता को खलती है | समाज और देश को तोड़ने वाले लोग, वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग, तथाकथित बुद्धिजीवी व मीडिया के लोगों ने मिल कर दुष्प्रचार का जो एक गहरा जाल संघ के इर्द-गिर्द बुना है, भारत की जनता को इसके आर पार देखने की आवश्यकता है |

शनिवार, 25 जनवरी 2014

जब तक ''गण'' सोये हुए है तंत्र सफल नहीं होगा ।

कल पूरा देश गणतंत्र दिवस उल्लास के साथ मनाने जा रहा हैं । 26 जनवरी, 1950 को हमने अपने देश का संविधान लागू किया था । जनता के द्वारा, जनता के लिये, जनता के शासन की व्यवस्था इस संविधान में की गयी थीं । समस्त कार्यों के सुचारु रूप से संचालन के लिये कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पारदर्शी प्रशासन के मूल उद्देश्य से प्रेस को चौथे स्तंभ के रूप में मान्यता दी गयी थी ।

संविधान में सभी स्तंभों के कार्यक्षेत्र का स्पष्ट विवरण दिया गया हैं। लेकिन कई बार ऐसे मौके भी आये जब इनमें यह होड़ मच गयी कि कौन सर्वोच्च हैं? ऐसे अवसर भी आये जब कभी विधायिका और न्यायपालिका आमने सामने दिखी तो कभी कार्यपालिका और विधायिका में टकराहट के स्वर सुनायी दिये तो कभी प्रेस पर स्वच्छंदता के आरोप लगे। ऐसे दौर में कुछ ऐसे अप्रिय वाकये भी हुये जो कि निदंनीय रहे।

‘गण’ को शिक्षित कर जागृत करने के अभियान को गति देने के प्रयास किये गये। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में इतने अधिक प्रयोग किये गये कि यह लक्ष्य हमसे आज साठ साल भी दूर ही दिखायी दे रहा हैं। वर्तमान में सरकार शिक्षा की गारंटी देने के उसी प्रकार प्रयास कर रही है जैसा कि रोजगार गारंटी योजना के तहत रोजगार की गारंटी दी गयी हैं। शिक्षा को प्रोत्साहन देकर जागृति लाने की महती आवश्यकता आज भी महसूस की जा रही हैं। ताकि ‘गण’ चुस्त हो सके।

‘तंत्र’ को नियंत्रित रखना अत्यंत आवयक हैं। ‘तंत्र’ यदि निरंकुश हो जाये तो ‘गण’ के अधिकारो को सुरक्षित रख पाना एक दुष्कर कार्य हो जाता हैं। एक समस्या यह भी हैं कि यदि देश में कोई ईमानदार हैं तो वो बाकी पूरे देश को बेइमान मानने लगता हैं। ऐसी घारणा हैं कि तंत्र को नियंत्रित रखने के लिये पारदर्शी प्रशासन होना अत्यंत आवश्यक हैं। इस दिशा में सरकार द्वारा लागू किया गया सूचना का अधिकार कानून कारगर साबित हो सकता हैं। लेकिन कानूनी बारिकियों और प्रशासनिक अमले की हठधर्मिता कई मामलों में आड़े आते दिखायी दे रही हैं। राजनेता भी तंत्र से राजनैतिक काम लेकर उन्हें नियंत्रित करने में असहाय दिख रहें हैं। जिससे तंत्र अनियंत्रित ही दिखायी दे रहा हैं।

‘गण’ यदि सुस्त हो और ‘तंत्र’ अनियंत्रित हो भला ‘गणतंत्र’ कैसे सफल हो पायेगा ?
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हमारी यही कामना हैं कि ‘गण’ जागृत हो, ‘तंत्र’ नियंत्रित हो और राजनेता इस दुष्कर कार्य को कर सकें ताकि ‘गणतंत्र’ सफल हो सके।