शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

!!खाद्य प्रासंस्करण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा !!

*****!!खाद्य प्रासंस्करण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा !!*****
!!-----खाद्य प्रासंस्करण उद्यमिता विकाश ट्रेनिंग 2012-----!!

संस्था द्वारा यह प्रसिक्षण पुर्णतः निशुल्क दिया जा रहा है ! इस प्रसिक्षण के आवेदन २१,२२,और २३ फरवरी २०१२ को बितरित. किये जावेगे और २४,२५ फरवरी को फॉर्म जमा किया जाएगा तथा २७ फरवरी २०१२ से प्रसिक्षण आरंभ होगा !!प्रसिक्षण की अवधि ४५ दिन की होगी !

नोट --इस प्रसिक्षण कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के सभी जिले के अभ्यार्थी अपने नजदीकी प्रसिक्षण केंद्र पर भाग ले सकते है !!

नोट --प्रसिक्षण से सम्बंधित समस्त पुस्तके पुर्णतः निःशुल्क बितरित की जावेगी ..!!

नोट --प्रसिक्षण सुबह ११.०० बजे से दोपहर ३.०० बजे तक !!

पता --HIGH TECH COMPUTER EDUCATION
१७ राजोले मार्केट मोती बंगला चौराहा आगरा -बॉम्बे रोड देवास (मध्यप्रदेश) ४५५००१
दूरभाष --07272 - 253353 ,07272 - 400245
मोबाईल --09826656698 ,९०७४७८७६४६
महत्व पूर्र्ण सूचना ---अधिक जानकारी के लिए "पत्रिका समाचार पत्र " दिनाक १५/०२/२०१२ को देखे (इंदौर शंस्करण )

!! लडकिया सच में पराया धन होती है ?

बचपन से ही हर घर मे यही सुना कि लड़की का क्या वो तो परायी अमानत होती पराया धन होती है यह बात सिर्फ राजपूत सामाज में ही नहीं सभी समाज में कही जाती है । कुछ हद तक तो एक समय के लिए मुझे भी लगा की वाकई बेटियाँ पराया धन होती हैं क्यूंकी पाल पोस कर, पढ़ा लिखा कर फिर एक अच्छा रिश्ते ढूँढ कर उसको घर से विदा करना कितना (अब सुखद कहूँ या दुखद भाव दोनो ही आते हैं उस वक्त जब बेटी को विदा किया जाता है) बड़ा और पुण्य का काम है| किंतु बेटी को घर भी नही बिठाया जा सकता ....... पुरानी रीत चली आ ...रही है, एक ना एक दिन तो बेटी को विदा करना है, ये तो रीत सबको निभानी होती है चाहे वो ग़रीब हो या अमीर|
किंतु तभी ख़याल आया बेटी पराया धन कहाँ होती हैं ......... आपको थोड़ा सा भी कष्ट हो बेटी तुरंत हाज़िर होती है ......... यदि आपको प्यास लगी हो तो बेटी तुरंत पानी लाती है चाहे वो खाना ही क्यूँ ना खा रही हो ........| यदि आपको सिर दर्द है तो तुरंत सिर दबाने बैठ जाती है .........| शादी के बाद भी बेटी का झुकाव अक्सर अपने माता पिता की ओर ही रहता है ..... फिर भी ये पराया धन ही कहलाती है ........ |

तो सोचो क्या कोई पराया इतना कर सकता है आप के लिए ...... मुझे तो नही लगता .......
बेटियाँ सुख की छाया होती हैं फिर भी उनको बचपन से ही पराया धन कहा जाता है ... क्यूँ, समझ से बाहर है ....|
हाँ आजकल कुछ आधुनिक माता पिता इनको पराया धन नहीं मानते । तो आप सभी के बिचार आमंत्रित है की क्या लडकिया  सच में पराया धन होती है ?