मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

भारत महाशक्ति बन सकता है क्या ??

हमारे देश भारत वर्ष के पूर्व राष्ट्रपति डा. ए. पी. जी. अब्दुल कलाम का सपना सन २०२० तक भारत को एक महाशक्ति के रूप में देखने का है| राजनैतिक स्तर पर कलाम की चाहत है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका का विस्तार हो और भारत ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाये। भारत को महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढाते देखना उनकी दिली चाहत है। वे तकनीक को भारत के जनसाधारण तक पहुँचाने की हमेशा वक़ालत करते रहे हैं। और यही सपना समस्त भारतवासियों का है| कि एक दिन हमारा देश सभी तरह के झगड़े-फसादों, जाती-सम्प्रदाय गत विद्वेषों आदि अनेक बुराइयों को छोड़कर विश्व में अग्रणी राष्ट्र बने| लेकिन हमारे समाज में इतनी सारी बुराइयां हैं नाम लेते ही थूकने का मन करता है| अब इन सब अनगिनत बुराइयों का बोझ पीठ पर लादे-लादे तो देश का विकास होने से रहा| होगा भी तो दस-बारह दशक तो लग ही जायेंगे|
तो माननीय सदस्यों! हम इसी विषय पर इस सूत्र में चर्चा करेंगे कि आखिर कैसे भारत एक महाशक्ति बन पायेगा? बन भी पायेगा या नहीं! बनेगा, तो कब तक बन पायेगा?
इन सब बातो पर बिचार बिमर्ष करने के बाद मैं निम्नलिखित बातो पर पहुचता हु ,मेरी राय में महाशक्ति बनने के लिए हमें कुछ अति महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर गौर करना होगा|जिसमें पहला है-तकनिकी| |अब दूसरे बिंदु पर आते हैं-श्रम का मूल्य|महाशक्ति बनने के लिये श्रम का मूल्य कम रहना चाहिये। तब ही देश माल का सस्ता उत्पादन कर पाता है और दूसरे देशों में उसका माल प्रवेश पाता है। चीन और भारत इस कसौटी पर अव्वल बैठते हैं जबकि अमरीका पिछड़ रहा है। विनिर्माण उद्योग लगभग पूर्णतया अमरीका से गायब हो चुका है, सेवा उद्योग भी भारत की ओर तेजी से रुख कर रहा है।हालांकि मुझसे ज्यादा इसके बारे में अर्थशास्त्री ज्यादा जानते होंगे, पर मैंने कहीं पर पढ़ा था कि "वह देश आगे बढ़ता है जिसके नागरिक खुले वातावरण में उद्यम से जुड़े नये उपाय क्रियान्वित करने के लिए आजाद होते हैं।" इसका मतलब शासन की कटु नज़र में शोध, व्यापार, अध्ययन, तकनीक, विचार, रचनात्मकता आदि सब कुंठित होकर रह जाती हैं, और ठीक से नहीं पनप पाती| अमेरिका में यह खुलापन उपलब्ध है| लेकिन हमारे यहां इसकी अपेक्षाकृत कमी दिखाई पड़ती है| ठीक से साधन और प्रोत्साहन उपलब्ध न होने के कारण भी आशाएं दम तोड़ देती हैं और जिससे प्रतिभाये पलायन कर जाती है और हम विकास के एक जरूरी अध्याय से वंचित रह जाते हैं,चीन में तो नागरिकों की उर्जा पर कम्युनिष्टों का नियंत्रण है,पर यदि हम आशावादी दृष्टी कोण से देखे तो |भारत महाशक्ति बनने के करीब है लेकिन हम भ्रष्टाचार की वजह से इस से दूर होते जा रहे है।हमारे नेताओ को जब अपने फालतू के कामो से फुरसत मिले तब ही तो वो इस सम्बन्ध मे सोच सकते है उन लोगो को तो फ्री का पैसा मिलता रहे देश जाये भाड मे। भारत को महाशक्ति बनने मे जो रोडा है वो है नेता। युवाओ को इस के लिये इनके खिलाफ लडना पडेगा, आज देश को महाशक्ति बनाने के लिये एक महाक्रान्ति की जरुरत है, क्योकि बदलाव के लिये क्रान्ति की ही आवश्यकता होती है लेकिन इस बात का ध्यान रखना पडेगा की भारत के रशिया जैसे महाशक्तिशाली देश की तरह टुकडे न हो जाये, अपने को बचाने के लिये ये नेता कभी भी रुप बदल सकते है।जिस प्रकार से आज छोटे छोटे प्रान्त बन रहे है राजनैतिक स्वार्थ के लिए उसी तरह से कल से कही अलगाव वादी ताकते सर नहीं उठाये इसके लिए हम सभी को सचेत रहना होगा !! ... यदि देश की सरकार भ्रष्ट होगी तो नागरिकों की उर्जा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है| देश की पूंजी गलत हाथों में पहुंचकर बर्बाद हो जाती है और देश गरीबी का शिकार हो जाता है| हमारे यहां माननीय नेतागण धन को स्विट्जरलैंड भेज देते हैं| धन के रिसाव के मामले में भारत बहुत तरक्की किये हुए है,आज हमारे भारतीय समाज में असमानता बहुत बढ़ रही है जिसका परिणाम गरीब और अमीर के अन्तर के बढ़ने से समाज में वैमनस्य पैदा होता है। गरीब की ऊर्जा अमीर के साथ मिलकर देश के निर्माण में लगने के स्थान पर अमीर के विरोध में लगती है। और समस्याएं खड़ी होकर सामने आती हैं,तो इन्ही बातो के साथ बंद करता हु यह लेख इन भावनाओं के साथ --मुझे तोड़ लेना वन-माली, उस पथ पर तुम देना फेंक !
                             मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएं वीर अनेक !!
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