सोमवार, 30 दिसंबर 2024

मनमोहन सिंह महान थे या गुलाम ?

आपको याद होगा लालकिले से प्रधानमंत्री के सम्बोधन देने के तुरंत बाद जब मनमोहन सिंह अपनी सीट पर बैठे माइक रह गया और वह सोनिया से कहते नजर आए "मैडम ठीक है ना"
वह एक ऐसा व्यक्तित्व बन गए थे जो पूरी की पूरी बॉडी लैंग्वेज से एक गुलाम नजर आता था।

 जब आप देश के प्रधानमंत्री थे तब देश में सैकड़ों आतंकवादी हमले हुए, लेकिन आप कभी देश के लिए कड़े फैसले लेते नज़र नहीं आये. क्या आपकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती थी देश की जनता के प्रति जो आतंकवाद से अपने अपने जिलों में जूझ रही थी. भ्रष्टाचार पर एक बार को ये भी कह दें कि आपके साथ के लोग कर रहे थे, लेकिन अंततः जिम्मेदारी तो आपकी ही थी न. 

2005
दिल्ली सीरियल ब्लास्ट (29 अक्टूबर, 2005)
दिवाली से ठीक पहले तीन स्थानों पर बम धमाके हुए। 60 से अधिक लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए।
जिम्मेदारी: लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद।

2006
वाराणसी ब्लास्ट (7 मार्च, 2006)
स्थान: संकट मोचन मंदिर और रेलवे स्टेशन
विवरण: दो बम धमाकों में 28 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए।
जिम्मेदारी: हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI)।

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट (11 जुलाई, 2006)
स्थान: मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात जगहों पर धमाके।
विवरण: 209 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए।
जिम्मेदारी: लश्कर-ए-तैयबा और सिमी।

2007
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट (18 फरवरी, 2007)
स्थान: हरियाणा के पास समझौता एक्सप्रेस ट्रेन।
विवरण: ट्रेन में दो बम धमाकों में 68 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश पाकिस्तानी नागरिक थे।

हैदराबाद ब्लास्ट (25 अगस्त, 2007)
स्थान: लुंबिनी पार्क और गोकुल चाट भंडार
विवरण: दो धमाकों में 42 लोग मारे गए और 50 से अधिक घायल हुए।
जिम्मेदारी: इंडियन मुजाहिदीन।

2008
जयपुर ब्लास्ट (13 मई, 2008)
स्थान: जयपुर के विभिन्न स्थानों पर।
विवरण: आठ धमाकों में 63 लोग मारे गए और 216 घायल हुए।

अहमदाबाद ब्लास्ट (26 जुलाई, 2008)
स्थान: अहमदाबाद के विभिन्न स्थानों पर।
विवरण: 21 धमाकों में 56 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए।

दिल्ली ब्लास्ट (13 सितंबर, 2008)
स्थान: दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर।
विवरण: पांच धमाकों में 30 लोग मारे गए और 90 घायल हुए।

26/11 मुंबई हमला (26-29 नवंबर, 2008)
स्थान: मुंबई (ताज होटल, ओबेरॉय होटल, नरीमन हाउस और CST स्टेशन)।
विवरण: पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने हमला किया। 166 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए।
जिम्मेदारी: लश्कर-ए-तैयबा।

2010
पुणे जर्मन बेकरी ब्लास्ट (13 फरवरी, 2010)
स्थान: पुणे
विवरण: धमाके में 17 लोग मारे गए और 60 घायल हुए।
जिम्मेदारी: इंडियन मुजाहिदीन।

2011
मुंबई ब्लास्ट (13 जुलाई, 2011)
स्थान: झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस, और दादर।
विवरण: तीन धमाकों में 26 लोग मारे गए और 130 घायल हुए।

दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट (7 सितंबर, 2011)
स्थान: दिल्ली हाई कोर्ट
विवरण: धमाके में 15 लोग मारे गए और 70 घायल हुए।
जिम्मेदारी: हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI)।

2013
पटना सीरियल ब्लास्ट (27 अक्टूबर, 2013)
स्थान: नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान गांधी मैदान।
विवरण: धमाकों में 6 लोग मारे गए और 85 घायल हुए।
जिम्मेदारी: इंडियन मुजाहिदीन।
फिर भी उन्होंने अपना iconic बयान दिया
"भारत के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है"। 
बाकी घोटाले की फैरीस्त इतनी लंबी है कि राज्यो से लेकर केंद्र तक कर फ़ाइल में एक घोटाला था।
 

इतिहास आपको एक रीढ़विहीन प्रधानमंत्री के तौर पर ही याद करेगी. 🙏

मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

अंबेडकर क्या सच में इतने महान थे ?

अज्ञात लेखक की पोस्ट को शेयर कर रहा हूं। इस पोस्ट से संबंधित तथ्यों पर कोई सहमति असहमति नहीं है मेरी लेकिन इच्छा जरूर है कि इसका तथ्यात्मक विश्लेषण हो।

अंबेडकर क्या सच में इतने महान थे, जितना अम्बेडकर के बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है ?

अम्बेडकर और उसका झूठा प्रचार बंद होना चाहिए। मैं कुछ मिथक रखता हूं अम्बेडकर से जुड़े हुए..

1-मिथक-अंबेडकर बहुत मेधावी थे।

सच्चाई -अंबेडकर पूरी जिंदगी में सदैव थर्ड डिग्री में पास हुए ।

2-मिथक -अंबेडकर बहुत गरीब थे!

सच्चाई -जिस जमाने में लोग फोटो नहीं खींचा पाते थे उस जमाने में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो है वह भी कोट पैंट में!

3-मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया !

सच्चाई -अंबेडकर के पिता जी खुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे!

4-मिथक- अंबेडकर को पढ़ने नहीं दिया गया।

सच्चाई -उस जमाने में अंबेडकर को गुजरात बढ़ोदरा के क्षत्रिय राजा सीयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर दिया।

5-मिथक- अंबेडकर ने नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया!

सच्चाई- अंबेडकर के समय ही 20 पढ़ी लिखी औरतों ने संविधान लिखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!

6- मिथक-अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे!

सच्चाई -अंबेडकर ने सदैव अंग्रेजों का साथ दिया भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की अंग्रेजो को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया

7-मिथक -अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे!

सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी

8- मिथक-अंबेडकर ने अकेले आरक्षण दिया!

सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा ने दिया जिसमे कुल 389 लोग थे अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था आरक्षण सब के वोट से दिया गया था

9-मिथक-अंबेडकर बहुत विद्वान था।

सच्चाई-अंबेडकर संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
स्थाई समीति के अध्यक्ष परम् विद्वान डाक्टर राजेंद्र प्रसाद जी थे।

10-मिथक-अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।

सच्चाई-1931मे गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी से भारत के टुकड़े करने की बात कर दलितों के लिए अलग दलिस्तान की मांग की थी।

11-मिथक-अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा।

सच्चाई-जो संविधान अंग्रेजों के1935 के मैग्नाकार्टा से लिया गया हो और विश्व के 12 देशों से चुराया गया है , उसे आप मौलिक संविधान कैसें कह सकते है ? 

अभी भी सोसायटी एक्ट में 1860 लिखा जाता है।

12-मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।

सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल जी संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे बाद में नेहरू के कहने पर पटेल जी वापस आये थे।

सरदार पटेल ने कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनाने के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों ने अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी।इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुंच जाएगा।

13-मिथक-अंबेडकर स्वेदशी थे।

सच्चाई-देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी,पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था।गांधी जी ने विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी।
यद्यपि कि नेहरू, गाधीं व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे।अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावा में नही है।अंबेडकर अंग्रेजिएत का हिमायती था।

बाकी कुछ मीम भी देख ही लीजिए आप लोग...