शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

Communal violence Law हिन्दुओ के खिलाफ कांग्रेस की साजिश ।

कांग्रेस ने सोचा था कि भारत 2020- 22 तक इस्लामिक राष्ट्र बन जाएगा इसलिए  2011 से लेकर 2013 तक "कम्युनल वायलेंस लॉ" को कांग्रेस ने तीन बार लोकसभा में प्रस्तुत किया, परन्तु बीजेपी ने लोकसभा में इसका जोरदार विरोध किया जिस कारण यह हिन्दुओं को गुलाम बनाने वाला कानून पास नहीं हो सका,यदि कानून पास हो जाता तो हिंदू निश्चित रूप से गुलाम हो जाता l इसलिए पहले हीं गाँधी परिवार ने प्रियंका वाड्रा के बेटे का नाम रेहान  रखा गया जो एक मुस्लिम नाम है कि कांग्रेस के लोग कह सके कि हमारा तो नेता रेहान है   और यह मुस्लिम हैl यह रेहान वाड्रा कि जगह रेहान खान हों जाता  फिर यह कांग्रेस पीढ़ी दर पीढ़ी राज्य करती रहती l क्या है यह कानून  नीचे  पढ़े 
Communal violence Law
"हिंदुओ के लिए फांसी का फंदा तैयार करने को कांग्रेस किस तरह से तैयार थी।"  इस "लेख को पूरा पढ़िए।  इसे पढ़कर कांप उठेंगे। अफसोस! मरते न जिन्दा रहते तड़प 2 कर जीते।" "बहन बेटिया आपके ही सामने हबस का शिकार अलग बनती।" 🙁
    

"Communal Violence Bill"

       कांग्रेस के लिये जान फूंकने वाले हिंदुओं सुनो मैं कांग्रेस का घोर विरोधी क्यों हूँ ।
    "एंटोनी माइनो" की भयानक खतरनाक साजिश।
      जिसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जायेगा। अगर लागू हो गया होता तो मरना भी दूभर हो जाता। जीने की बात ही छोड़ो। तुम्हारे विनाश वाला बिल जिसे काँग्रेस ने दो बार संसद मे पेश किया। 2005 मे और फिर 2011में ।  "कांग्रेस हिंदुओं के खिलाफ ऐसा बिल लेकर आई थी जिसको सुनकर आप कांप उठेंगे । परन्तु भाजपा के जबरदस्त विरोध के कारण वह पास नहीं करवा सकी" मुझे यकीन है कि 96% हिन्दुओ को  तो अपने खिलाफ आये इस बिल के बारे में कुछ पता भी नहीं होगा जिसमें शिक्षित हिंदू भी शामिल है, क्योंकि हिंदू सम्पत्ति जुटाने में लगा है उसको इन सब बातों को जानने के लिए समय नहीं है । जबकि मुसलमान के "अनपढ़ भी इतने जागरूक है कि पाकिस्तान," बांग्लादेश, अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये गए हिन्दू व अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता देने वाले CAA क़ानून के खिलाफ मुसलमान का बच्चा बच्चा उठ खड़ा हुआ । अगर काँग्रेस दुबारा सत्ता में आई तो यह बिल फिर लेकर आएगी । 
       क्या है " दंगा नियंत्रण कानून" 
हिंदू समाज के लिए #फांसी का फंदा, कुछ एक लोगों को इस बिल के बारे में पता होगा, 2011 में इस बिल की रुप रेखा को सोनिया गाँधी की विशेष टीम ने बनाया था जिसे NAC भी कहते थे, इस टीम में दर्जन भर से ज्यादा सदस्य थे और सब वही थे जिन्हें आजकल अर्बन नक्सली कहा जाता है.. कांग्रेस का कहना था की इस बिल के जरिये वो देश में होने वाले दंगों को रोकेंगे। अब इस बिल में कई प्रावधानो पर जरा नजर डालिए :--
📌 इस बिल में प्रावधान था कि दंगों के दौरान दर्ज अल्पसंख्यक से सम्बंधित किसी भी मामले में सुनवाई कोई हिंदू जज नहीं कर सकता था ।
📌 अगर कोई अल्पसंख्यक सिर्फ यह आरोप लगा दे कि मुझसे भेदभाव किया गया है तो पुलिस को अधिकार था कि आपके पक्ष को सुने बिना आपको जेल में डालने का हक होगा और इन केसों में जज भी अल्पसंख्यक ही होगा..
📌 इस बिल में ये प्रावधान किया गया था कि कोई भी हिन्दू दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ 
के लिये अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध केस दर्ज नहीं करवा सकता ।
📌 इस बिल में प्रावधान किया गया था कि अगर कोई अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति हिन्दू पर हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, हत्या का आरोप लगाता है तो कोर्ट में साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है केवल मुकदमा दर्ज करवा देना ही काफ़ी है । बल्कि कोर्ट में निर्दोष साबित होने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जिस पर आरोप लगाया गया है ।
📌  इस बिल में ये प्रावधान किया गया था कि दंगों के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए बहुसंख्यक को जिम्मेदार मानते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के नुकसान की भरपाई हिंदू से की जाए । जबकि बहुसंख्यक के नुकसान के लिए अल्पसंख्यक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता था ।
📌  अगर आपके घर में कोई कमरा खाली है और कोई मुस्लिम आपके घर आता है उसे किराए पर मांगने के लिए तो आप उसे कमरा देने से इंकार नहीं कर सकते थे क्योंकि उसे बस इतना ही कहना था कि आपने उसे मुसलमान होने की वजह से कमरा देने से मना कर दिया यानि आपकी बहन बेटी को छेड़ने वाले किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ भी हम कुछ नहीं कर सकते थे। मतलब कि अगर कोई छेड़े तो छेड़ते रहने दो वर्ना वो आपके खिलाफ कुछ भी आरोप लगा देता….. आपकी सीधी गिरफ़्तारी और ऊपर से जज भी अल्पसंख्यक..
📌 देश के किसी भी हिस्से में दंगा होता, चाहे वो मुस्लिम बहुल इलाका ही क्यों न हो, दंगा चाहे कोई भी शुरू करता पर दंगे के लिए उस इलाके के वयस्क हिन्दू पुरुषों को ही दोषी माना जाता और उनके खिलाफ केस दर्ज कर जांचें शुरू होती। और इस स्थिति में भी जज केवल अल्पसंख्यक ही होता ऐसे किसी भी दंगे में चाहे किसी ने भी शुरू किया हो..
📌अगर दंगों वाले इलाके में किसी भी हिन्दू बच्ची या हिन्दू महिला का रेप होता तो उसे रेप ही नहीं माना जाता । बहुसंख्यक है हिन्दू इसलिए उसकी महिला का रेप रेप नहीं माना जायेगा और इतना ही नहीं कोई हिन्दू महिला बलात्कार की पीड़ित हो जाती और वो शिकायत करने जाती तो अल्पसंख्यक के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का केस उस पर अलग से डाला जाता..
📌 इस एक्ट में एक और प्रस्ताव था जिसके तहत आपको पुलिस पकड़ कर ले जाती अगर आप पूछते की आपने अपराध क्या किया है तो पुलिस कहती की तुमने अल्पसंख्यक के खिलाफ अपराध किया है, तो आप पूछते की उस अल्पसंख्यक का नाम तो बताओ, तो पुलिस कहती – नहीं शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जायेगा..
📌 कांग्रेस के दंगा नियंत्रण कानून में ये भी प्रावधान था की कोई भी इलाका हो बहुसंख्यको को अपने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से पहले वहां के अल्पसंख्यकों का NOC लेना जरुरी होता यानि उन्हें कार्यक्रम से कोई समस्या तो नहीं है । ऐसे हालात में अल्पसंख्यक बैठे बैठे जजिया कमाते क्यूंकि आपको कोई भी धार्मिक काम से पहले उनकी NOC लेनी होती, और वो आपसे पैसे की वसूली करते और आप शिकायत करते तो भेदभाव का केस आप पर और ऐसे हालात में जज भी अल्पसंख्यक..
📌 और भी अनेको प्रावधान थे कांग्रेस के इस दंगा नियंत्रण कानून में जिसे अंग्रेजी में # Communal Violence Bill भी कहते है..
सुब्रमण्यम स्वामी ने इस बिल का सबसे पहले विरोध शुरू किया था और उन्होंने इस बिल के बारे में लोगों को जब बताया था तो 2012 में हिन्दू काँप उठे थे तभी से कांग्रेस के खिलाफ हिन्दुओं ने एकजुट होना शुरू कर दिया था। सुब्रमण्यम स्वामी का पूरा लेक्चर इस
 "Communal Violence Bill" पर आज भी मौजूद है, 45 मिनट से ज्यादा का है। आप चाहे तो  यू टयूब पर सर्च कर लें, और अच्छे से सुन लें..
अब इस के बाद भी जो हिन्दू कांग्रेस को support करता है वे जाने अनजाने अपने ही लोगो के लिए नरक का  द्वार खोल रहे हो इसे जानो,
 नोट -- इस सन्देश को जरूर शेयर करो  इस हिन्दू "विरोधी ओर राष्ट्रद्रोही कोंग्रेस  को देश व जनता के सामने नंगा कर दो।" 
ये है पक्का सबूत काग्रेस का हिन्दू विरोधी होने का
इसे "आप नेट पर भी सर्च कर सकते हैं !!"

रविवार, 27 जून 2021

पुष्पमित्र सुंग कौन थे ?

है तो कॉपी पेस्ट, पर इतिहास में रुचि है तो जरूर पढिये....🙏

जिसके सिर पर तिलक ना दिखे उसका सर धड़ से अलग कर दो-: सम्राट पुष्यमित्र शुंग 

यह बात आज से लगभग 2100 वर्ष पहले की है । एक किसान ब्राह्मण के घर एक पुत्र ने जन्म लिया , जिसका नाम रखा गया पुष्यमित्र था अर्थात पुष्यमित्र शुंग ....... और वह बना एक महान हिंदू सम्राट जिसने भारत देश को बौद्ध देश बनने से बचाया ।

अगर पुष्यमित्र शुंग जैसा कोई राजा कंबोडिया मलेशिया या इंडोनेशिया में जन्म लेता तो आज भी यह देश हिंदू देश होते ।

जब सिकंदर राजा पोरस से मार खाकर अपना विश्व विजय का सपना तोड़ कर उत्तर भारत से शर्मिंदा होकर मगध की ओर गया था तो उसके साथ आए हुए बहुत से यवन वहां बस गए थे  ।

सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म अपना लेने से उनके बाद उनके वंशजों ने भारत में बौद्ध धर्म लागू करवा दिया ।

ब्राह्मणों के द्वारा इस नीति का विरोध होने पर उनका सबसे अधिक कत्लेआम हुआ , लाखों ब्राह्मणों की हत्याएं हुईं , हजारों मंदिर गिरा दिए गए , इसी समय पुष्यमित्र के माता-पिता को धर्म परिवर्तन के लिए कहा गया , जब उन्होंने मना कर दिया तो  छोटे से बालक पुष्यमित्र के सामने ही उसके माता-पिता को काट दिया गया  ।
बालक चिल्लाता रहा मेरे माता पिता को छोड़ दो पर किसी ने नहीं सुनी माता-पिता को मरा देखकर पुष्यमित्र की आंखों में रक्त उतर आया उसे गांव वालों की संवेदना से नफरत हो गई और उसने प्रतिज्ञा ली कि वह इसका बदला बौद्धों से एक दिन जरूर देगा और जंगल की ओर भाग गया ।

ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण योग की सूक्ष्म क्रियाओं का ज्ञान पुष्यमित्र को था अतः उसने महान योग क्रियाओं के द्वारा अपने शरीर को अत्यधिक बलवान बना लिया , वह जंगल में रहता था निरंतर योग एवं शस्त्र विद्या का अभ्यास करता था ।

एक दिन बौद्ध राजा बृहद्रथ मौर्य वन में घूम रहा था अचानक वहां उसके सामने एक सिंह आ गया , सिंह सम्राट की ओर झपटा ही था तभी अचानक एक लंबा चौड़ा बलशाली भीमसेन जैसा बलवान युवक  शेर  के सामने आ गया और उसने अपनी मजबूत भुजाओ से उस शेर के जबड़े को पकड़कर , उसके दो टुकड़े कर बीच से चीर दिया और सम्राट से कहा कि आप अब सुरक्षित हो ।

सम्राट ने पूछा - " कौन हो तुम "
युवक - " ब्राह्मण हूं महाराज "

उसका पराक्रम देखकर सम्राट ने कहा - " सेनापति बनोगे "

युवक  आकाश की ओर देखकर रक्त से अपना तिलक कर  बोला - "मातृभूमि को जीवन समर्पित है "

उसी वक्त सम्राट ने उसे मगध का उप सेनापति घोषित कर दिया जल्दी ही अपने शौर्य और पराक्रम के बल पर वह प्रधान सेनापति बन गया ।

 शांति का पाठ अधिक पढने के कारण मगध साम्राज्य कायर हो चुका था,लेकिन पुष्यमित्र के अंदर ज्वाला अभी भी जल रही थी वह रक्त से स्नान करने और तलवार से बात करने में विश्वास रखता था ।

पुष्यमित्र एक निष्ठावान हिंदू था और भारत को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाना उसका स्वप्न था ।

आखिर वह दिन भी आ गया ,  यवनों की लाखों की फौज ने मगध पर आक्रमण कर दिया ।
पुष्यमित्र समझ गया कि अब मगध विदेशी गुलाम बनने जा रहा है , जब उसने यह बात सम्राट बृहद्रथ को बताई तो सम्राट बृहद्रथ युद्ध कर मगध रक्षा करने के पक्ष में नहीं  था , उसका कहना था की युद्ध से रक्तपात होता है और हमें शांति चाहिए युद्ध नहीं ।

मगध के नागरिकों में यवनों का भय व्याप्त होने लगा क्योंकि युद्ध के बाद यवन लूटपाट और हत्याएं तथा स्त्रियों का हरण करते थे  ।

पुष्यमित्र ने बिना सम्राट की आज्ञा लिए सेना को युद्ध के लिए तैयारी करने का आदेश दे दिया उसने कहा कि"  इससे पहले के दुश्मन के पैर हमारी मातृभूमि पर पड़े हम उसका शीश उड़ा देंगे" । यह नीति तत्कालीन मौर्य साम्राज्य के बौद्ध धार्मिक विचारों के विरुद्ध थी,
सम्राट बृहद्रथ पुष्यमित्र के पास गया और गुस्से से बोला  " यह किसके आदेश से तुम सेना को युद्ध के लिए तैयार र रहे हो " ।

पुष्यमित्र ने कहा - "मातृभूमि की रक्षा के लिए मुझे  किसी की आज्ञा की आवश्यकता नहीं है और ब्राह्मण किसी की आज्ञा नहीं  लेता है"  यह कहकर पुष्यमित्र ने सम्राट का सर तलवार के एक ही प्रहार से धड़ से अलग कर दिया ।

लाल आंखों वाले पुष्यमित्र ने सम्राट के रक्त से अपना तिलक किया और पुष्यमित्र ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा  - " ना बृहद्रथ महत्वपूर्ण है , ना पुष्यमित्र , महत्वपूर्ण है तो हमारी मातृभूमि क्या तुम मातृभूमि के लिए रक्त बहाने को तैयार हो पुष्यमित्र की शेर जैसी गरज की आवाज से सेना जोश में आ गई और सभी  सैनिक आगे बढ़कर बोले ..."हां सम्राट पुष्यमित्र हम तैयार हैं"

पुष्यमित्र ने कहा - " आज मैं सेनापति ही हूं " चलो काट दो यवनों को जो मगध पर अपनी विजय पताका फहराने का स्वप्न पाले हुए हैं और युद्ध में गाजर मूली की तरह ही यवनों को काट दिया गया ।

 एक सेना जो कल तक दबी हुई , डरी हुई रहती थी आज युद्ध में हर हर महादेव और जय महाकाल के नारों से दुश्मन को थर्रा रही थी ।

यवनों ने मगध तो छोड़ दिया और अपना राज्य भी खो दिया ।

इसके बाद पुष्यमित्र का राज्याभिषेक हुआ ।

 सम्राट बनने के बाद पुष्यमित्र ने घोषणा की कि - " अब मगध में कोई बौद्ध धर्म नहीं मांनेगा , हिंदू सनातन धर्म ही राजधर्म है ,  और जिसके माथे पर तिलक ना दिखे वह सर धड़ से अलग कर दिया जाएगा "

उसके बाद पुष्यमित्र ने वो किया जो आज तक नहीं हुआ , जिससे आज भारत कंबोडिया नहीं है हजारों की संख्या में बौद्ध मंदिर जो कि हिंदू मंदिरों को ध्वस्त कर कर बनाए गए थे उन्हें ध्वस्त करा दिया गया बौद्ध मठों को तबाह कर दिया गया चाणक्य काल की वापसी की घोषणा हुई और तक्षशिला विश्वविद्यालय का सनातन शौर्य फिर से स्थापित हुआ और जो लोग अपने सनातन धर्म को त्याग कर बौद्ध बन गए थे उन्होंने पुनः सनातन धर्म में वापसी की और जिन लोगों ने सनातन धर्म का विरोध किया उनकी लाखों की संख्या में पुष्यमित्र ने हत्या करा दी ।

पुष्यमित्र शुंग के पुत्र सम्राट अग्निमित्र शुंग ने अपना साम्राज्य तिब्बत तक फैला लिया और तिब्बत भारत का अंग बन गया वह बौद्धों को दौड़ता  हुआ चीन तक ले गया वहां चीन के सम्राट ने अपनी बेटी की शादी अग्निमित्र से करके संधि स्थापित की , और  इनके वंशज आज भी चीन में शुंग उपनाम नाम ही लिखते हैं ।

पंजाब,अफगानिस्तान,सिंध की शाही ब्राह्मण वंशावली के बाद शुंग वंश सबसे बेहतरीन सनातन साम्राज्य था शायद पेशवा से भी महान , जिसने सनातन धर्म को पुनः स्थापित करने का महान कार्य किया ।

हमें गर्व करना चाहिए अपने पूर्वजों पर जिन्होंने अपने बलिदान से हमें आज सर उठा कर जीने का अधिकार दिलाया ।

 आग लगा देनी  चाहिए इस फिल्म इंडस्ट्री को जो ब्राह्मण को कमजोर और भ्रष्ट बताती है ।

हिंदू चाहे किसी भी वर्ण का हो उसे सदैव गलत और पूरे विश्व में आतंकवाद फैलाने वाले इस्लामिक आतंकवादियों से श्रेष्ठ बताती है ।

पुष्यमित्र जैसा सनातन धर्म का रक्षक आज तक कोई नहीं हुआ वह जानता था कि बिना शास्त्र और शस्त्र के धर्म की रक्षा नहीं हो सकती ।
आवश्यकता है अपने बच्चों को सही इतिहास बताने की ।

जयतु सनातन धर्म....🚩
#NSB