शुक्रवार, 29 मार्च 2013

!! इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रातिकारी विचार!!



 

ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

              कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३
 

मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

             नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०






 

इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

                             सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१
 

हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
                             ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६
  
  
 

मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
                             संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार ।
  
  
  
  
 

हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
                            प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१
 

पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।
                            बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७
 

ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ;                        - रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर
 

मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।
                            गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग
 

मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

                             पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५
 

छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया ।

                            - डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८
 

मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

                             वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७
 

मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

                             - कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५
 

अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

                             - भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ ३५-३६

गुरुवार, 28 मार्च 2013

!! केजरीवाल जी का जनता से मोह भंग हुआ क्यों ?

अन्ना से अलग होना, राजनीतिक पार्टी बनाना

सेकुल्रिज़िम की तरफ झुकाव 

लोकपाल' का दामन छोड़ना
 

जो उम्मीद दूसरों से, उस पर खुद खरे नहीं

सबका विरोध?

नीतियों में खामियां, साफगोई की कमी
मुझे एना जी का ओ आन्दोलन याद आता है जब बरसते हुए पानी में लाखो लोगो की भीड़ कहदी थी एना जी के साथ पर आज वही भीड़ अरविन्द केजरीवाल जी के पास से गायब है तो मन में एक कसक से उठती है की कहिकार ऐसा क्यों हो रहा है तब मन कुछ बिश्लेषण करने लगता है और उस बिशेल्शन के अनुसार  अरविंद केजरीवाल जी ने आप पार्टी की स्थापना के बाद से लगातार राजनेता, उनसे जुड़े लोगों, कॉरपोरेट घरानों और मीडिया को निशाने पर लिया है। अरविंद जी  ने लेफ्ट को छोड़कर देश की तकरीबन सभी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों को कोसा है। केजरीवाल ने संसद की गरिमा को भी कई मौकों पर चोट पहुंचाई है। उनका कहना है कि संसद में डकैत, लुटेरे और बलात्कारी बैठे हैं। जबकि सच यह है कि संसद में ऐसी छवि के कई नेताओं के बावजूद कई अच्छी छवि के नेता भी मौजूद हैं। अब इसे लोकतंत्र की खूबी कहिए या खामी केजरीवाल जी  जिन नेताओं को दागी छवि का बताते हैं, उन्हें जनता ने ही संसद में चुनकर भेजा है। केजरीवाल जी की बयानबाजी और खुलासों का जनता के बीच बहुत अच्छा संदेश नहीं गया। वे सबके विरोधी के तौर पर देखे जाने लगे। जब तक वे केंद्र सरकार और कुछ राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ जहर उगल रहे थे, तब तक उनकी बातें जनता के बीच जाती रहीं। लेकिन जैसे ही वे सबके विरोधी के तौर पर उभरे, उन्हें 'कवरेज' मिलनी बंद हो गई। मशहूर लेखक चेतन भगत के मुताबिक, 'मौजूदा राजनेताओं पर लगातार हमले करते हुए सनसनी फैलाने की एक सनक के अलावा राजनीतिक शुद्धता की कमी ऐसी ही एक कमजोरी है। भावनाओं से भरा कोई एक्टिविस्ट सीमित तथ्यों के साथ कोई भी फैसला दे सकता है। मगर एक राजनेता के तौर पर इस बात का ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि क्या बोला जा रहा है। पॉलिटिकली करेक्ट जैसा जुमला यूं ही नहीं बना। दिल से अपनी बात कहना अच्छा है, लेकिन गलत बात बोलकर आप राजनीति में तुरंत अपनी साख गंवा सकते हैं।' 
   
!! जो उम्मीद दूसरों से, उस पर खुद खरे नहीं !!
अरविंद केजरीवाल जी के कुछ सहयोगियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। लेकिन केजरीवाल  जी ने उनके खिलाफ एक आंतरिक जांच आयोग गठित कर कुछ दिनों बाद उन्हें क्लीनचिट दे दी। जब यही काम दूसरी राजनीतिक पार्टियां करती हैं तो केजरीवाल  जी उन्हें भ्रष्ट बताते हैं। लेकिन जब यही आरोप उनके साथियों पर लगे तो उन्होंने वही किया जो आम तौर पर अन्य पार्टियां भी करती हैं। लोकपाल आंदोलन की वजह से केजरीवाल  जी से जनता की उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं। ऐसे में उनसे बेहतर बर्ताव की उम्मीद लोगों को रही होगी। लेकिन जब वे उसी रास्ते पर चलते दिखे, जिस पर अन्य पार्टियां चल रही हैं तो उनकी लोकप्रियता को धक्का लगा। आरोपों की जांच तक केजरीवाल जी अपने साथ खड़े उन साथियों को दूर कर सकते थे, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 

!! नीतियों में खामियां, साफगोई की कमी !!
   
केजरीवाल जी की राय कई मुद्दों पर उलझी हुई है। कई अहम मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए वे जनमत की वकालत करते हैं। लेकिन केजरीवाल जी इस बात को क्यों नहीं समझते हैं कि भारत जैसे 1.21 अरब आबादी वाले देश में यह आसान काम नहीं है। वह भी तब जब आबादी का एक बड़ा हिस्सा पढ़ा-लिखा नहीं है। इसके अलावा आर्थिक मुद्दों पर उनकी जानकारी बहुत भरोसा नहीं जगा पाती है। मशहूर लेखक चेतन भगत जी के मुताबिक, 'केजरीवाल को नई वैश्वीकृत विश्व अर्थव्यवस्था की ज्यादा समझ नहीं है। उनकी विचारधारा विकास विरोधी वामपंथी विचारों के ज्यादा करीब लगती है, जहां पर तमाम विदेशियों, बड़ी-बड़ी कंपनियों और अमीर लोगों को बुरा और भ्रष्ट समझा जाता है, जबकि छोटे कारोबार तथा गरीब लोग अच्छे माने जाते हैं। यह सोच भाषणों में तालियां बटोरने के लिहाज से तो खूब कारगर हो सकती है, लेकिन राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा नहीं। भले ही भारत आज भ्रष्टाचार मुक्त देश हो जाए, लेकिन तब भी हम एक अमीर देश नहीं होंगे। सुनियंत्रित पूंजीवाद, खुली अर्थव्यवस्थाओं और मुक्त बाजारों ने दुनियाभर में धन-संपत्ति निर्मित की है। हमें इन्हें मंजूर करना चाहिए, ताकि भारत में भी ऐसा हो।' दिल्ली में बिजली-पानी के बिल का विरोध करते हुए वे कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति बिजली का बिल न चुकाए। क्या ऐसी अपील से निरंकुशता नहीं बढ़ेगी? क्या ऐसे मुद्दों पर कोर्ट के दरवाजे बंद हैं ?
!! अन्ना से अलग होना, राजनीतिक पार्टी बनाना !!
अन्ना हजारे से अलग होकर सामाजिक आंदोलनों की राह छोड़कर नई राजनीतिक पार्टी बनाने के अरविंद केजरीवाल  जी के फैसले की भी आलोचना हुई है। कई लोगों का कहना है कि राजनीति से बाहर रहकर ही नेताओं और पार्टियों पर नैतिक दबाव बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक जब तक अन्ना और अरविंद साथ-साथ थे और उनका आंदोलन सामाजिक था तब तक लोग उनके साथ थे। लेकिन जैसे ही अरविंद ने आप पार्टी बनाई, वैसे ही कई लोगों की नजरों में उनकी नैतिक शक्ति खत्म हो गई और वे भी उसी जमात में शामिल हो गए, जिनकी वे आलोचना कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ चुके पूर्व सैनिक अन्ना हजारे से अलग होने का भी खामियाजा अरविंद को भुगतना पड़ रहा है।

!! लोकपाल' का दामन छोड़ना !!
कई लोगों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल जी को लोकपाल कानून के लिए आंदोलन को राजनीतिक या गैर राजनीतिक तरीके से चलाते रहना चाहिए था। लेकिन आप पार्टी बनाने के बाद अरविंद ने कहा कि जब तक अच्छे लोग (जैसे उनकी पार्टी के संभावित उम्मीदवार) संसद या विधानसभाओं में नहीं पहुंचेंगे तब तक लोकपाल जैसे अन्य अच्छे कानून नहीं बनेंगे। अरविंद जी के इस बयान से कई लोगों के बीच यह संदेश गया कि मौजूदा हालात में लोकपाल नहीं बन सकता और उन्हें भ्रष्टाचार से मुक्ति जल्द नहीं मिल सकती। यह लोकपाल आंदोलन ही है, जिसकी वजह से लोग अन्ना और अरविंद  जी से जुड़े थे। लेकिन अरविंद के इस रुख से लोग निराश हो गए और मीडिया ने भी अरविंद को ज्यादा तवज्जो देना बंद कर दिया। 
यार ये तो गलत है ..साथी भूखो मर रहा है 6 दिन से और है की होली के रंग गुलाल में मस्त ...!