शनिवार, 5 जुलाई 2014

जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से !


विविधताओं से भरे हमारे देश में देवताओं,इंसानों,पशुओं,पक्षियों व पेडों की पूजा अर्चना तो आम बात है लेकिन मै यहाँ एक ऐसे स्थान की चर्चा करने जा रहा हूँ जहाँ इन्सान की मौत के बाद उसकी पूजा के साथ ही साथ उसकी बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है, और बाकायदा लोग उस मोटर साईकिल से भी मन्नत मांगते है और हाँ इस चमत्कारी मोटर साईकिल ने आज से लगभग २१ साल पहले सिर्फ स्थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि सम्बंधित पुलिस थाने के पुलिस वालो को भी चमत्कार दिखा आश्चर्यचकित कर दिया था और यही कारण है कि आज भी इस थाने में नई नियुक्ति पर आने वाला हर पुलिस कर्मी ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले यहाँ मत्था टेकने जरुर आता है |
जोधपुर अहमदाबाद राष्ट्रिय राजमार्ग पर जोधपुर से पाली जाते वक्त पाली से लगभग 20 km पहले रोहिट थाने का " दुर्घटना संभावित" क्षेत्र का बोर्ड लगा दिखता है और उससे कुछ दूर जाते ही सड़क के किनारे जंगल में लगभग ३० से ४० प्रसाद व पूजा अर्चना के सामान से सजी दुकाने दिखाई देती है और साथ ही नजर आता है भीड़ से घिरा एक चबूतरा जिस पर एक बड़ी सी फोटो लगी,और हर वक्त जलती ज्योत | और चबूतरे के पास ही नजर आती है एक फूल मालाओं से लदी बुलेट मोटर साईकिल | यह वही स्थान है और वही मोटर साईकिल जिसका में परिचय करने जा रहा हूँ |
यह "ओम बना " का स्थान है ओम बना ( ओम सिंह राठौड़ ) पाली शहर के पास ही स्थित चोटिला गांव के ठाकुर जोग सिंह जी राठौड़ के पुत्र थे जिनका इसी स्थान पर अपनी इसी बुलेट मोटर साईकिल पर जाते हुए १९८८ में एक दुर्घटना में निधन हो गया था | स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थान पर हर रोज कोई न कोई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाया करता था जिस पेड के पास ओम सिंह राठौड़ की दुर्घटना घटी उसी जगह पता नहीं कैसे कई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते यह रहस्य ही बना रहता था | कई लोग यहाँ दुर्घटना के शिकार बन अपनी जान गँवा चुके थे | ओम सिंह राठोड की दुर्घटना में मृत्यु के बाद पुलिस ने अपनी कार्यवाही के तहत उनकी इस मोटर साईकिल को थाने लाकर बंद कर दिया लेकिन दुसरे दिन सुबह ही थाने से मोटर साईकिल गायब देखकर पुलिस कर्मी हैरान थे आखिर तलाश करने पर मोटर साईकिल वही दुर्घटना स्थल पर ही पाई गई, पुलिस कर्मी दुबारा मोटर साईकिल थाने लाये लेकिन हर बार सुबह मोटर साईकिल थाने से रात के समय गायब हो दुर्घटना स्थल पर ही अपने आप पहुँच जाती | आखिर पुलिस कर्मियों व ओम सिंह के पिता ने ओम सिंह की मृत आत्मा की यही इच्छा समझ उस मोटर साईकिल को उसी पेड के पास छाया बना कर रख दिया | इस चमत्कार के बाद रात्रि में वाहन चालको को ओम सिंह अक्सर वाहनों को दुर्घटना से बचाने के उपाय करते व चालकों को रात्रि में दुर्घटना से सावधान करते दिखाई देने लगे | वे उस दुर्घटना संभावित जगह तक पहुँचने वाले वाहन को जबरदस्ती रोक देते या धीरे कर देते ताकि उनकी तरह कोई और वाहन चालक असामयिक मौत का शिकार न बने | और उसके बाद आज तक वहाँ दुबारा कोई दूसरी दुर्घटना नहीं हुयी |
ओम सिंह राठौड़ के मरने के बाद भी उनकी आत्मा द्वारा इस तरह का नेक काम करते देखे जाने पर वाहन चालको व स्थानीय लोगों में उनके प्रति श्रधा बढ़ती गयी और इसी श्रधा का नतीजा है कि ओम बना के इस स्थान पर हर वक्त उनकी पूजा अर्चना करने वालों की भीड़ लगी रहती है उस राजमार्ग से गुजरने वाला हर वाहन यहाँ रुक कर ओम बना को नमन कर ही आगे बढ़ता है और दूर दूर से लोग उनके स्थान पर आकर उनमे अपनी श्रद्धा प्रकट कर उनसे व उनकी मोटर साईकिल से मन्नत मांगते है | मुझे भी कोई दो साल पहले अहमदबाद से जोधपुर सड़क मार्ग से आते वक्त व कुछ समय बाद एक राष्ट्रिय चैनल पर इस स्थान के बारे प्रसारित एक प्रोग्राम के माध्यम से ये सारी जानकारी मिली और इस बार की जोधपुर यात्रा के दौरान यहाँ दुबारा जाने का मौका मिला तो सोचा क्यों न आपको भी इस निराले स्थान के बारे में अवगत करा दिया जाये |

अब ओम बना के बारे पूरा परिचय हो ही गया है तो लगे हाथ उनकी आराधना में यह विडियो युक्त भजन भी सुनते जाईये |

Read more: http://www.gyandarpan.com/2009/03/blog-post.html#ixzz36YxxTNLr


सचमुच अपना देश महान है । सच में यहाँ के लोगो की आस्था महान हैं । जिस देश एक ''मोटरसाइकल'' की ''पूजा'' की जा सकती है । उस देश के लोगो की आस्था को महान ही कह सकते है ?

-ज्ञान  दर्पण ब्लॉग से साभार ।  

गुरुवार, 26 जून 2014

सामान नागरिक संहिता - अपेक्षाएं और आकांक्षाएं


आज की सबसे बड़ी आवशकता है विचार क्रांति ।  इसके तीन आधार हैं “व्यक्ति निर्माण -अर्थात व्यक्तित्व का परिष्कार !परिवार निर्माण -अर्थात परिवार मेंश्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण !समाजऔर राष्ट्र निर्माण -अर्थात समाज को श्रेष्ठ नागरिक प्रदान करना जो अपनी प्रतिभा ,योग्यता और क्षमता का एक अंश सतत राष्ट्र के हित में समर्पित करने के लिए कृत संकल्प हो !यदि यह कार्य देश को आजादी मिलने के बाद हमारे तथा कथित उस समय के नेता अथवा शिक्षा विद जो अपने आपको प्रकांड विद्वान मानते थे ,किये होते तो आज हमारी यह दुर्दशा नहीं हुई होती !भारतीय संस्कृति से ओत प्रोत जीवन मूल्यों पर आधारित प्राचीन शिक्षाप्रणालीजिसमें शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय होता था; को हमारे स्कूलों मेंलागू करने के बजाये लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को एक षड़यंत्र के तहत लागू किया गया और हमारे बड़े बड़े डिग्री धारीनेता मूक दर्शक बन कर रह गए और यंही से हमारा अवमूल्यन प्रारंभ हो गया !हमारा संविधान जो बना वह आधा अधूरा बना !एक तरफ तो वह समानता की बात करता है तो दूसरी तरफ आरक्षण की !मध्यकाल में जो जातिवाद ;अश्पृश्यता वर्ण विभेद उंच नीच की भावना थी उसे इस संविधान को बनाने वाले और लागू करने वालों नें और बढाया !काश !हमारा संविधान मौलिक होता जिसमे हमारे पूर्वजों की थाती होती !गीता का दर्शन ;रामायण की मर्यादा औरबुद्ध की करूणा;महावीर की शुचिता औरचाणक्य की नीति; कुछ भी तो नहीं है इस संविधान में !वसुधेव कुटुम्बकम की भावना भारतीय संस्कृति की आत्मा है यह जानते हुएभी हमारे नेताओं ने क्यों समान नागरिक संहिता को लागू करने मेंहिचकिचाया !आज के समस्त समस्याओं का मूल वर्तमान संविधान है जिसमे इंडिया दैट इज भारत कहा गया है बजरंग मुनि जी की आज की वार्ता हमारे तथा कथित हत्यारे ;भ्रष्ट; डकैत बलात्कारी आरोपी राजनेताओं को अवश्य देखना चाहिए और अपने हृदय को परिवर्तित कर ;वोट की राजनीतिको त्याग कर बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के राष्ट्रव्यापी महाभियान में अपना योगदान देकर अपने कुकर्मो का प्रायश्चित करना चाहिए यही समय की मांग है ।




नागरिक संहिता तथा आचार संहिता बिल्कुल अलग-अलग अर्थ और प्रभाव रखते हैं। नागरिक संहिता नागरिक की होती है, राजनैतिक व्यवस्था से जुड़ी होती है, सामूहिक होती है जबकि आचार संहिता व्यकित की होती है, व्यकितगत होती है, समाज या राज्य के दबाव से मुक्त होती है। नागरिक संहिता को हर हाल में समान होना ही चाहिये दूसरी ओर आचार संहिता को समान करने का प्रयत्न घातक होता है।विवाह, खानपान, भाषा, पूजा-पद्धति, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि आचार संहिता से जुड़े विषय हैं। कोर्इ सरकार इस संबंध में कोर्इ कानून नहीं बना सकती। सुरक्षा, न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में सरकारी सहायता व्यकितगत न होकर नागरिकता से जुड़े हैं। इस संबंध में सरकार कोर्इ कानून बना सकती है।
स्वतंत्रता के समय से ही आचार संहिता और नागरिक संहिता का अन्तर नहीं समझा गया और न आज तक समझा जा रहा है। आचार संहिता तथा नागरिक संहिता को एक करने के कारण समाज में अनेक समस्याएं बढ़ती गर्इं समाज टूटता गया तथा राजनेता मजबूत होते चले गये। राजनेता तो लगातार चाहता है कि समाज, धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्रीयता, उम्र, लिंग, गरीब-अमीर, किसान, मजदूर के रूप में वर्ग विद्वेष वर्ग संघर्ष की दिशा में बढ़ता रहे तथा राजनेता बिलिलयों के बीच बन्दर बनकर सुरक्षित रहें।
भारत की राजनैतिक व्यवस्था को व्यकित, परिवार, गांव, जिला, प्रदेश, देश और विश्व के क्रम में एक दूसरे के साथ जुड़ना चाहिये था, किन्तु उसे जोड़ा गया व्यकित, जाति, वर्ण, धर्म, समाज के क्रम में। स्वाभाविक था कि उपर वाला क्रम एक दूसरे का पूरक होता तथा नीचे वाला क्रम एक दूसरे के विरूद्ध। स्वतंत्रता के तत्काल बाद अम्बेडकर जी, नेहरू जी आदि ने तो सब समझ ते हुए भी यह राह पकड़ी जिससे समाज कभी एक जुट न हो जावे किन्तु अन्य अनेक लोग नासमझी में आचार संहिता और नागरिक संहिता को एक मानने लगे। आज भी संघ परिवार के लोग समान नागरिक संहिता के नाम पर आचार संहिता के प्रश्न उठाते रहते हैं। विवाह एक हो या चार यह नागरिक संहिता का विषय न होकर आचार संहिता से संबंधित है जिसे बहुत चालाकी से नागरिक संहिता में घुसाया गया है।
आज भारत में जो भी सामाजिक समस्याएं दिख रही हैं उनका सबसे अच्छा समाधान है समान नागरिक संहिता। भारत एक सौ इक्कीस करोड़ व्यकितयों का देश होगा, न कि धर्म, जाति, भाषाओं का संघ। भारत के प्रत्येक नागरिक को समान स्वतंत्रता होगी। संविधान के प्रीएम्बुल में समता शब्द को हटाकर स्वतंत्रता कर दिया जायेगा। प्रत्येक नागरिक के अधिकार समान होंगे। न्यायालय भी कर्इ बार समान नागरिक संहिता के पक्ष में आवाज उठा चुका है। अब समाज को मिलकर इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिये।