सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मोदी जी कि दूरदर्शी योजना


मोदी जी गाय का वध करने के सख्त विरोधी है और वह सोलर ऊर्जा बिजली के दीवाने हैं, लेकिन मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देकर गाय की हत्या रोकने का दूरदर्शी योजना आपको मोदी का कायल बना देगी. देखिये, कैसे..

1. मोदी समुद्र में मछली पकडने वालो को सब्सिडी देते है, जिससे की लोग यदि मांसाहार करना भी चाहे तो मछली खाए, न की जानवरो और गायों का मांस खाए..

2. किसान अनुपयोगी जानवर गोशालाओ को बेचे, न की कसाई को और गो-वध शाला को...

3. गोशाला में इन पशुओ के गोबर से बायो गैस बनाई जाये और और बायोगैस संयत्र से निकला उत्तम कम्पोस्ट खाद किसानो को सस्ते दाम में देकर विष मुक्त खेती को बढ़ावा दिया जाये. बायो गैस रिफिल्लिंग के क्षेत्र में भी बहुत काम किया जाना बाकि है, जिससे पेट्रोल की बचत की जा सके और विदेशी मुद्रा बचाई जा सके.

4. गावो में आधुनिक मछली पालन केंद्र बनाये जाये, जिसके लिए सरकार सहायता देगी. इस मछली तालाब का आधा भाग सौरी उर्जा पैनलो से ढका जाये, जिससे मछली को छाव मिले और पानी जल्दी न सूखे. सोलर बिजली को पास के गाव को दिया जाये, जिससे गाव खुशहाल हो. मोदी सूर्य ऊर्जा को हर गाव -हर घर तक पहुचाने के लिए बहुत बड़ी योजना के समर्थक है. जाहिर है, मोदी सौर ऊर्जा के दीवाने हैं, जिसमे कोई प्रदुषण नहीं होता, यह फ्री में और 40 साल तक चलता है. सौर ऊर्जा गारंटी के साथ साल के 365 दिन मिलता रहेगा.

5. तालाब के किनारे आवश्यक रूप से फल देने वाले पेड़ लगाये जाये और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी उद्यान विकसित किया जाये, जिससे लोग स्वस्थ रहे...

6. सस्ती मछली मिलने से लोग जानवरों का महगा मांस खाने से परहेज करेंगे और बीमार भी नहीं होंगे. मछली खाने से अच्छा स्वस्थ्य भी मिलेगा..

7. मछली पालन और इसके उपयोग से प्रदुषण नहीं होता है. मछली के अवशेषों को पशु-पक्षी खाकर वातावरण को साफ़ रखेंगे. जानवरों के वध से पृथ्वी और हवा-पानी प्रदूषित हो जाते हैं, जिसका अनुभव हम सबको है...

8. गाव में तालाब होने से गाव का माहौल खुशनुमा रहता है और जिव-जंतु-पक्षी -जानवरों को हमेशा पीने का पानी उपलब्ध होगा..

9. आजकल जानवरों के क़त्ल का सारा जिम्मा मुस्लिम समुदाय के पास. जिससे लोगो को लगता है, मुस्लिम जानवरों को मार रहे हैं. जब की मछली पालने और बेचने का काम गैर मुस्लिम भी करके इस क्षेत्र की आमदनी में अपना हिस्सा सुनिश्चित कर पायेगे. जाहिर है पशु वध बंद होने से मछली-पालन व्यवसाय में बहुत लोगो को रोजगार मिलेगा.

10. किसानो को अच्छी नस्ल की गाये (जर्सी नहीं ) पालने के लिए सहायता दी जायेगी और भैंस पालन से विमुख किया जायेगा. जिससे गो-शाला में भैस न जा पानेसे यह कसाई के हाथ न पड़े. यानी भैस् पालन बंद और गो-पालन को बढ़ावा..

11. गाय पालन का मतलब है की स्वस्थ और खुशहाल समाज. क्योकि गाय हमें पालती है, न की हम गाय को पालते हैं. मछली पालन और गोशाला हमारे समाज में सुचिता लाएगी..

12. मोदी जी गो-हत्या, शराब का उत्पादन व् विक्री और वेश्यावृत्ति को राष्ट्रीय स्तर पर पाबन्दी लगाने के हामी हैं. भारत में शराब अपराधों की जननी बन चुकी है.
नोट----: फेसबुक से साभार 

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

मस्तक पर तिलक (टीका,टिकुली,बिंदी) क्यों ?



 मस्तक पर तिलक प्रति दिन जरुर करना चाहिए अपने देश में है मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा प्रचलित है। यह प्राचीन है। दरअसल, हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट में जिस स्थान पर टीका या तिलक लगाया जाता है यह भाग आज्ञाचक्र है । शरीर शास्त्र के अनुसार पीनियल ग्रन्थि का स्थान होने की वजह से, जब पीनियल ग्रन्थि को उद्दीप्त किया जाता हैं, तो मस्तष्क के अन्दर एक तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है । पीनियल ग्रन्थि के उद्दीपन से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होगा । इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन है / हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है विजयश्री प्राप्त करने के उद्देश्य रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुम्कुम का तिलक लगाया जाता है । स्त्रियां लाल कुंकुम का तिलक लगाती हैं। यह भी बिना प्रयोजन नहीं है। लाल रंग ऊर्जा एवं स्फूर्ति का प्रतीक होता है। तिलक स्त्रियों के सौंदर्य में अभिवृद्धि करता है। तिलक लगाना देवी की आराधना से भी जुड़ा है। देवी की पूजा करने के बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है। तिलक देवी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। इससे आज्ञाचक्र को नियमित उत्तेजना मिलती रहती है । तन्त्र शास्त्र के अनुसार माथे को इष्ट इष्ट देव का प्रतीक समझा जाता है / हमारे इष्ट देव की स्मृति हमें सदैव बनी रहे इस तरह की धारणा , ध्यान में रखकर, मन में उस केन्द्र बिन्दु की स्मृति हो सकें । शरीर व्यापी चेतना शनैः शनैः आज्ञाचक्र पर एकत्रित होती रहे । अतः इसे तिलक या टीके के माध्यम से आज्ञाचक्र पर एकत्रित कर, तीसरे नेत्र को जागृत करा सकें ताकि हम परा – मानसिक जगत में प्रवेश कर सकें । तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता हैं व देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता हैं। तिलक जिस भी पदार्थ का लगाया जाता हैं उस पदार्थ की ज़रूरत अगर शरीर को होती हैं तो वह भी पूर्ण हो जाती हैं। तिलक किसी खास प्रयोजन के लिए भी लगाये जाते हैं जैसे यदि मोक्षप्राप्ती करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शान्ति प्राप्ति हेतु अनामिका से लगाया जाता हैं। आमतौर से तिलक अनामिका द्वारा लगाया जाता हैं और उसमे भी केवल चंदन ही लगाया जाता हैं तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी को आकर्षित करने का तथा ठंडक व सात्विकता प्रदान करने का निमित छुपा हुआ होता हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को तिलक ज़रूर लगाना चाहिए। देवताओ को तिलक मध्यमा उंगली से लगाया जाता है मनोविज्ञान की दृष्टि से भी तिलक लगाना उपयोगी माना गया है। माथा चेहरे का केंद्रीय भाग होता है/ उसके मध्य में तिलक लगाकर, दृष्टि को बांधे रखने का प्रयत्न किया जाता है। तिलक हिंदू संस्कृति का पहचान है। तिलक केवल धार्मिक मान्यता नहीं है/ तिलक लगाने से मन को शांति मिलती है/ चन्दन को पत्थर पर घिस कर लगाते है / ऐनक के सामने हमारी मुखमंडल की आभा काफी सौम्य दिखता है/ तिलक से मानसिक उतेज़ना पर काफी नियंत्रण पाया जा सकता है/ तंत्र शास्त्र में पंच गंध या अस्ट गंध से बने तिलक लगाने का बड़ा ही महत्व है तंत्र शास्त्र में शरीर के तेरह भागों पर तिलक करने की बात कही गई है, लेकिन समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है। इसलिए इस पर तिलक करने की परंपरा अधिक प्रचलित है।