शनिवार, 9 मार्च 2013

!! चलिए हासिये और फ्रेश हो जाइये !!

 !अरे भागवान माफ़ कर गलती हो गई अब नहीं दाटूगा दुबारा !

अरे क्या कर रहे हो ..बजन ले लिया हो तो पानी में डालो अब

है हिम्मत इस सोफे में आराम करनी की ?

चल कैमरा तो छोड़ मान गया की तू बहुत सुन्दर है ..

अरे बाप रे इतनी बड़ी मछली ओ भी  इस सीजन में ?

मैं कैसा हु ? कैटरीना कैफ के लायक हु क्या ?

चलो रास्ता छोडो .तीन तीन राजकुवारी जा रही है शैर के लिए ...

समय -समय की बात है ..

क्या करे आराम का मामला है रिस्क तो लेना ही पडेगा

मेरा टाइटन मेरी प्रेमिका कोई आपत्ति है ?

मुझे डिस्टर्ब नहीं करो .मैं काम कर रहा हु समझे ..

क्या करे नेता कुर्शी के लिए मरते है तो हम क्यों नहीं दौड़े कुर्शी के लिए

हम मिलकर खायेगे .हम इन्सान नहीं जानवर है पछी है पर इंसानों से ज्यादा समझदार है ...

हमारा वाथ टब यही है ..

वाह वाह क्या मस्त है यार तू...

अरे इसमें हवा भरते भरते तो मेरी हवा खिसक गई ..

सूरज तू मेरा पीछा मत कर .मुझे बहुत जल्दी है ..सवारी को मंजिल तक पहुचाना है ...

मेरे सर जी समझदार है ओ सब पढ़ लेते है चित्र में चरित्र देख लेते है ..

माना की हमें बर्फ में रहते है पर ठंडी तो हमें भी लगती है ..

अबे जल्दी कर .जान लेगा क्या बच्चे का ?

यहाँ तो सभी इडियट लगते है ?

हथियार के आगे इंसान छोटा नहीं बहुत छोटा बन जाता है ..

मिस काल से .....

ओये बिल्ले मुझे डरा रहा है क्या ? चल रास्ता नाप ..

सैया तो मिल जायेगे पर ये सिलंदर ..?

साथी.कंधा लेना  पर मेरी जान नहीं लेना (सबसे नीचे वाले के बोल है )

जल्दी करो मेडम जी मेरी घरवाली ने देख लिए तो मेरी दाल रोटी बंद हो जायेगी और बदले में बेलन की मार खानी पड़ेगी ! वैसे मैं कैसा लग रहा हु ?

क्या करू पापी पेट का सवाल है ?

चल जा .अब सादी करना है मुझे .अब कोई जरुरत नहीं तेरी .

लािन में लाइन मार रहे है ?

बच्चे पालना आसान काम है क्या ?

चल उठ ना ,थक गया क्या ?

आम के आम गुठिलियो के दाम !

हे राम कहा है मेरी ..............?

ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे ..तोड़ेगे दम मगर तेरा साथ ना छोड़ेगे ...

माँ क्यों रो रही हो ?

मेरी सौतन फेसबुक ,रुक अभी बताती हु तुझे .! ना रहेगा बॉस न बजेगी बासुरी...!

बुधवार, 6 मार्च 2013

जय हो समाजवाद =मसाज कंपनी =परिवारवाद ....??

यदि यही समाजवाद  है तो हमें नहीं चाहिए ऐसा समाजवाद ....!


Brijesh Pandey
डीएसपी जिया उल हक की पत्नी को पचीस लाख
और उनके पिता को पचीस लाख का चेक
मुख्यमंत्री उनके घर जाकर दिए .. घर के तीन
सदस्य को सरकारी नौकरी .. और जितने साल
डीएसपी की नौकरी बाकि थी उतने साल पुरे वेतन
भी मिलेंगे .. अच्छा है
किसी भी सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी निभाते
हत्या होने पर सरकार को उसके परिवार के साथ
खड़े रहना चाहिए ..
लेकिन मंजुनाथ .. सतेन्द्र दुबे और
पाकिस्तानी सेना के द्वारा सर कलम किये गये
भारतीय सैनिक लोग भी तो अपनी ड्यूटी निभाते
शहीद हुए थे लेकिन उन्हें इतना सब कुछ
क्यों नही मिला? जिया उल हक के घर दिल्ली से
जामा मस्जिद का दी इमाम
बुखारी भी अपनी राजनितिक रोटीयाँ सेकने पहुच
गया .. बस फर्क इतना है मंजूनाथ, सतेन्द्र दुबे
और तीन भारतीय सैनिक हिन्दू थे और जिया उल
हक मुस्लिम ... जिया उल
हक का समाज वोट बैंक की श्रेणी में आता है और
मंजुनाथ का समाज यानी हिन्दू वोट बैंक
की श्रेणी में नही आता.. पता नहीं ये वोट
बैंक की लिए मुलायम और अखिलेश
गोवत कितना गिरेगी ?

जय हो समाजवाद =मसाज कंपनी =परिवारवाद ....??