शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

!! भदौरिया राजपूत (जो कि चौहान वंश के ही होते हैं ) का ईतिहास !!


भदौरिया राजपूत कुल का नाम है। इनका नाम ग्वालियर के ग्राम भदावर पर पड़ा। इस वंश के महाराजा को'महेन्द्र'(पृथ्वी का स्वामी) की उपाधि से संबोधित किया जाता है। यह उपाधि आज भी इस कुल के मुखिया के नाम रहती है | एक पाण्डुलिपिके अनुसार १६५० में आगरा के भदौरिया का उलेख इस प्रकार किया गया है :-
वो एक असंख्य उद्यमी और वीर योद्धा हैं, उनके हर गाँव में किला और किलेबंदी थी, वो बिना युध्य के
कभी भी जागीरदार या हाकिम को लगान नहीं देते थे, रियाया जो हल चलती थी, उनके कंधे पर बंदूक लटकती थी और अंटी में अभरक बंधा होता था | उन्हे लगान माफी के रूप में हाकिम से (अभरक और गंधक) बारूद मिलता था |
भदौरिया चार श्रेणी में बटे हुए है ये बिभाजन १२०० सताब्दी में राजा रज्जू राउत के चार पुत्रो से शुरु हुआ जो उनके चार विवाहों से हुए क्रमशा :- १. कुंवर बामदेओ (पहला विवाह - बरसला, पिनाहट के राव खीरसमद की पुत्री से) के वंसज राउत भदौरिया के नाम से जाने जाते है २. कुंवर मानसिंह ( दुसरा विवाह - असा मुरेना के राव गुमम सिंह तोमर की पुत्री से) के वंसज मेनू भदौरिया के नाम से जाने जाते है ३. कुंवर तस्-सिंह (तीसरा विवाह - नर्केजरी, राजस्थान के राव ज्ञान सिंह गौर की पुत्री से) के वंसज तसेला भादौरिया के नाम से जाने जाते है ४. राजा उदय राज (चोथे विवाह - लाहार के राजा कारन सिंह कछवाहा की पुत्री से) राजा हुए १४०० शताब्दी तक उनका वंश बिना किसी विभाजन के चला १४२७ में जैतपुर की स्थापना करनेवाले राजा जैतसिंह के भाई कुंवर भाव सिंह १४४० में कालपी के नवाब के लहार पर आक्रमण को विफल किया और कालपी के नवाब को मार कर उसका कुल्हा (राजमुकुट)छीन लिया, इस घटना के बाद से कुंवर भाव सिंह के वंसज कुल्हिया भादौरिया के नाम से जाने जाते है.

"भदौरिया"की प्रतिशाखा
राजा रुद्र प्रताप १५०९/१५४९ ई और उनकी तीसरी रानी (पुत्री राजा मदन सिंह परिहार, रामगढ़, एता ) के पुत्र राजा मुक्तमन १५४९/१५९०, का वंश अठभईया भदौरिया के रूप में जाना जाता है आठ बड़े भाइयों की वरीयता में राजा मुक्तमन अपने पिता के उत्तरअधिकारी होने में सफलहुए थे !
इस कुल का इतिहास गौरव पूर्ण रहा है और भदौरिया राजाओ ने कई किलो और मंदिरों का निर्माण कराया |भदावर राजाओ का एक छत्र राज्य रहा जिसमें भदावर का सर्वांगीण विकास होता रहा।

इस कुटुम्ब के संस्थापक मानिकराय, अजमेर के चौहान को मना जाता है, उनके पुत्र राजा चंद्रपाल देव (७९४-८१६) ने ७९३ में"चंद्रवार"(आज का फिरोजाबाद) रियासत की स्थापना की और वहां एक किले का निर्माण कराया जो आज भी फिरोजाबाद में स्थित है।
८१६ में उनके पुत्र राजा भदों राव (८१६-८४२) ने भदौरा नामक शहर की स्थापना की और उन्होने ८२० में उत्तंगन नदी के तट पर किले का निर्माण कराया जो आज की अटेर तहसील में स्तिथ है।'भदौरा'के निवासी भदौरिया नाम जाने जाने लगे। राव कज्जल देव (११२३-११६३) ने ११५३ में हथिकाथ पर कब्जा किया और अपनी राज्य की सीमओं को आज की बाह तहसील तक बढ़ा दिया ।
राजा शल्य देव (११९४-१२०८) (उन्हे सेल्ला देओ या राउत साल के नाम से भी जाना जाता है) गौरी शाह के हमलो के दौरान हुई अफरातफरी का फायदा उठाया और मेरठ और फ़र्रुख़ाबाद पर कब्जा कर लिया। इस कुल ने १२०८ तक चंद्रवार पर राज्य किया। १२०८ मे गुलाम वंश के पहेले सुलतान कुतुबुद्दीन ऐबक ने भदौरा पर आक्रमण किया और विषम युद्ध में दोनों तरफ़ नर्संघार हुआ।
इस नर्संघार में राजा राउत साल के वीरगति को प्राप्त होने पर, महल में उनकी रानियों ने जोहर कर लिया, एक रानी जो गर्भवती थी,परम्परा के अनुसारगर्भवती को जोहर के आज्ञा नही होती थी अतः रानी को हथिकाथ के किला से मिर्धा जाति का एक जाट व्यक्ति जो राजा राउत शाल का संदेश वाहक था, किले की नाली केरास्ते, जमुना पार सिकरवार (आज का फेतेपुर सिकिरी )उनके मैय्के तक लाया | मिर्धा की इस सहायता को भदौरिया आज तक नही भूले भदावर की शादीयों में आज भी मिर्धा के नाम से हल्दी के थापे लगाये जाते है |
इस रानी ने वहां एकमात्र भदौरिया वंशज बेटे को जनम दिया, उसका नाम रज्जू रखा गया | १२५९ में, जब वह १२ साल का हुआ और तत्कालीन सम्राट नासिर-उद-दीन के दिल्ली दरबार में प्रस्तुत हुआ, सम्राट नासिर-उद-दीन इस इलाके के मेव लुटेरो से परेशान थे, १२ साल का यह भदौरिया बालक'रज्जू राउत'मेवाती लुटेरों को आगरा के पिन्हाट से बाहर फेंकने की बात का सम्राट को अस्वासन देकर दरबार से विदा हुआ मेवो का हथिकाथ पर कब्जा था रज्जू राउत ने १२४६ में हथिकाथ पर धावा बोल दिया और मेवाती मुखिया हतियामेओ बेग से हथिकाथ किला अपने कब्जे में ले लिया | १२५८ में सम्राट नासिर-उद-दीन ने उसे भदावर रियासत का राजा घोषित कर दिया|
आगरा से ५२ मील दक्षिण-पूर्व चम्बल के बायें किनारे हथिकाथकिला भदौरीयो का प्रधान मुख्यालय था, भदौरिया हमेशा ही दिल्ली के सुलतान से बगावत करते रहे, वे अपने शौर, उपद्रवीसव्भाव और स्वाधीनता प्रेम केलिए जाने जाते है | अधम खान ने हथिकाथ किले को अपने अधिकार में ले लिया, और दिल्ली के सुलतान ने उसे किला जागीर में दे दीया |
जुलाई ७, १५०५ के अति दारूण भूकम्प से जान-माल की हानि हुई,उसी वर्ष भदौरिया राजपूतो ने हथिकाथ, पिन्न्हात तहसील में राजद्रोह कर दीया, पर उसका दमन कर दिया गया ! सिकंदर लोधी ने भदौरीयो के दमन के बाद उन पर अंकुश रखने के लिए हथिकाथ से आगरा तक थानों का निर्माण कराया. सुलतान ने अपनी राजधानी के उत्तरी नगर प्रान्त में'सिकन्दरा'नाम के गाँव की स्थापना की और वहा लाल पत्थर की बरादरी का निर्माण किया |
अकबर के शासनकाल (१५५६-१६०५) में भदौरिया राजा को"महेन्द्र"की उपाधि दी गयी जो आज भी इस कुल के मुखिया के नाम रहती है | कुछ वर्षो के बाद उनका बेटा १००० का मंसबदार बना और गुजरात युद्ध में गया, जहागीर और शाहजहाँ के शासनकाल(१६०५-५८ ) में, भदौरिया राजाओ ने अफगानिस्तान के युद्ध में वीरता दिखाई, तब वे मुगलों को औरों से अधिक प्रिय हो गए, उन्हे चौहानों के उपेक्षा अधिक आभूषित किया गया | औरंगजेब के शासनकाल में, भदावर राजा महासिंह ने बुंदेले के ख़िलाफ़ युद्ध मेंअपनी श्रेष्ठता दिखाई, और उनके पुत्र को राजपूताना के चित्तोड़ का गवर्नर बना दिया गया |
जब मुगलों के साम्राज्य का पतन हो रहा था, तब भदौरिया प्रभावशाली व सर्वशक्तिमान थे | १७०७ में सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद हुयी लडाई में भदावर के राजा कल्याण सिंह भदौरिया ने पर धौलपुर कब्जा किया और १७६१ तक धौलपुर भदावर रियासत का हिस्सा रहा | १७०८ में भदावर सैनिक, उम्र-ऐ-उज्ज़म महाराजाधिराज श्रीमान महाराजा महेंद्र गोपाल सिंह भदौरिया नये गोंध पर धावा बोला, राणा भीम सिंह कोयुद्ध में हरा कर गोंध के किले पर कब्जा किया और गोंध को भदावर में मिला लिया १७३८ तक गोंध भदावर की हिस्सा रहा |
१७४८ में मराठो और जाटो ने उनके राज्य का बड़ा भाग हतिया लिया |कुछ समय पश्चात् ही, भदौरिया राजा ने आपने भूभाग पर कब्जा कर लिया, और ग्वालियर के मराठा दरबार में दोस्ती का प्रस्ताव रखा, किन्तु मरोठो के विरुद्ध अपने मित्र गोंध के राणा की मदद करने के कारण उन्हे, सिंधिया के कोप का भाजन होना पड़ा, और ये कुल १८०३ के मराठा युद्ध तक विसम परिस्थिति में रहा !!

द्वारा-- एक राजपूत मित्र

बुधवार, 8 अगस्त 2012

15 अगस्त २०१२ पर विशेष ...सच्चे देशभक्त कैसे होते है ? क्या आप सच्चे देशभक्त है ?

फिर एक स्वतंत्रता दिवस,, देश के प्रति अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त करने का दिवस ! स्वयं पर स्वयं का शासन सेलीब्रेट करने का अवसर,हमारे यहाँ त्योहारों की विशाल श्रृंखला में राष्ट्रीय पर्व मनाने के कितने कम अवसर हैं फिर भी हम देश के प्रति अपना प्यार दर्शाने के लिए इन्हीं दो दिवस का इंतजार क्यों करते हैं ?
थोड़ठहसोचिएगा कि अपने ही देश को प्यार करना हमारे लिए इतना मुश्किल क्यों हैं? जाहिर है, देशभक्त युवाओं को यह बात स्वीकार नहीं होगी कि वे देश को प्यार नहीं करते! वतो अपने वाहनों पर तिरंगा लहराते हैं, अपने मोबाइल में देशभक्ति की हैलो ट्यून लगवाते हैं, स्क्रीनसेवर, वॉलपेपर,डेस्कटॉप, वेशभूषा सब तो देश के प्यार में रंगे होते हैं फिर कैसे मान लें कि हमें इस दिन की परवाह नहीं ? हमें देश से प्यार नहीं? देशभक्ति को किसी पैमाने पर नहीं मापा जा सकता इसके लिए सचमुच दिल पर हाथ रखकर खुद को ही कुछ ईमानदार जवाब देने होंगे !

क्या आप नशा करते हैं?
अगर इस प्रश्न का उत्तर 'हाँ' हैं तो माफ कीजिएगा आप अपने देश से प्यार नहीं करते,, देश को सशक्त, संस्कारी और जोश से भरे युवाओं की आवश्यकता है ! अगर आप नशे के शिकंजे में फँसे हैं तो चाहे दिल में आपके ‍कितनी ही देशभक्ति लहरा रही हो लेकिन देश के वह किसी काम की नहीं,, अपनी रचनात्मकता का आप दो प्रतिशत भी इस देश को नहीं देते हैं क्योंकि नशा आपको इस लायक छोड़ता ही नहीं है.......
नशा आपसे स्वयं पर नियंत्रण छीन लेता है ! आपकी सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर देता है! जब आप नशे की हालत में होते हैं तब सही-गलत का अंतर भूल जाते हैं! खुद का भला भी नहीं सोच पाते फिर देश के लिए वक्त कहाँ से निकालेगें ? अगर आप अपने आप को यूँ बर्बाद कर रहे हैं तो यकीन जानिए कि आप देश को बर्बाद कर रहे हैं !हाँ, आप देश से प्यार नहीं कर रहे हैं.............

क्या आप महिलाओं का सम्मान करते हैं?
अगर इस प्रश्न का उत्तर देने में आपको सोचना पड़ रहा है। सीधे-सादे प्रश्न को समझने में भी आपको वक्त लग रहा है तो अपने आपसे पूछिए कि क्या सचमुच आप देश को प्यार करते हैं। आप दोस्तों के साथ एकांत में लड़कियों को लेकर अश्लील टिप्पणी करते हैं, आप लड़कियों की नाजुक भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं, आपने कितनी ही लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फँसा कर छोड़ दिया है, आप नेट पर आपत्तिजनक साइट्स ढूँढते हैं, लड़कियाँ आपके लिए मौज-मस्ती का सबजेक्ट है और सड़क चलते, बसों और अन्य जगहों पर आप उन पर फब्तियाँ कसते हैं तब तो आप इस देश में रहने लायक ही नहीं हैफिर आपकी दिखावे की देशभक्ति देश के किस काम की ?यह देश सदियों से नारीत्व को सम्मान देने वाली गरिमामयी संस्कृति के लिए जाना जाता है अगर इस देश में रहकर आप नारी का किसी भी रूप में अपमान करते हैं तो आप इस देश से प्यार नहीं करते............
क्या आप सड़क पर गंदगी फैलाते हैं ?

इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए आपको अपनी आदतों का निष्पक्ष मुआयना करना होगा। पैदल,सड़क चलते कार का दरवाजा खोलकर पान की पिक थूकते हैं, गंदी पोलिथीन, गुटखे के पाउच और सिगरेट के टुकड़े जहाँ-तहाँ फेंकते हैं। ऐतिहासिक स्थलों पर कोयले या चॉक से प्रेम का इजहार करते हैं, किसी भी दीवार को बाथरूम समझ लेते हैं, घर का कूड़ा दूसरों के घर के सामने छोड़ आते हैं तो खुद ही जवाब दीजिए कि ऐसा कैसा प्यार है आपका जो अपने ही प्यारे देश को गंदा और अव्यवस्थित करने पर तुला है?

अगर आप इनमें से कोई या इससे मिलती-जुलती वह हरकत करते हैं जो सड़क को गंदा करती है तो आपको कोई हक नहीं सरकार की नाकामियों को कोसने का, आपको कोई हक नहीं व्यवस्था को गाली देने का और तो और आपको अपने देश को प्यार करने का भी हक नहीं है, फिर भी अगर आप अपने देश को चाहते हैं तो यह चाहत देश के लिए बेमानी है...........
क्या आप रिश्वत देते या लेते हैं?

अपना काम जल्दी करवाने के लालच में आप पैसे देने से नहीं हिचकिचाते या आप खुद किसी काम को जल्दी करने के लिए ऊपरी आमदनी में विश्वास रखते हैं तो इस प्रश्न के उत्तर के साथ ही आपने अपने देश के सच्चे नागरिक होने का अधिकार खो ‍दिया है. भ्रष्टाचार तमाम बुराइयों की जड़ है. लालच इस भ्रष्टाचार की जननी है. अगर आप किसी भी रूप में इस तरह के काम में शामिल हैं तो देश के लिए कितने ही ऊँचे स्वर में नारे लगा लीजिए सब खोखले हैं. आप अगर सचमुच अपने देश को प्यार करते हैं तो इसे भीतर से भी खूबसूरत बनाइए, , कर्मों से ऐसे आदर्श रचिए कि भ्रष्टाचार का मूल समाप्त हो सके............

क्या आप मक्कार हैं ?
अगर आप अपने काम को बोझ समझते हैं, निरंतर सुधार और बेहतरी की और नहीं बढ़ते हैं तो कोई हक नहीं आपको देशप्रेम के गानों पर झूमने और नाचने का. अगर आप सिर्फ अपने बॉस को दिखाने के लिए काम करते हैं ! .उनकी अनुपस्थिति में आप केंटिन की शोभा बढ़ाते हैं या दूसरी टेबलों पर गपियाना आपका प्रिय शगल है तो अप्रत्यक्ष रूप से आप अपने देश का नुकसान कर रहे हैं.......
अपना तो खैर कर ही रहे हैं क्योंकि बेईमानी पहले इंसान को नीचे गिराती है बाद में दूसरों को हानि पहुँचाती है ! जिस देश में मक्कारी और बेईमानी ने पैर फैला रखें हो वह तरक्की की राहों पर तेजी से कैसे बढ़ सकेगा ? जब देश की तरक्की में आपका कोई योगदान नहीं तब आपका प्यार लेकर देश कितने दिन कामयाबी के परचम लहरा सकेगा ?

देश का नाम रोशन करने की जिम्मेदारी सिर्फ सचिन या साइना नेहवाल की ही नहीं है आपकी भी है! आप अपने काम के सचिन यानी मास्टर बनिए यही असली देशभक्ति होगी.............
कहने को इस तरह के प्रश्नों की लंबी फेहरिस्त है जिनके उत्तर आपको यह समझने में मददगार होंगे कि आपके मन में अपने देश के लिए कितना प्यार है ! प्यार, महज 'आई लव माय इंडिया' जैसे शब्दों से ही जाहिर नहीं होता बल्कि आपके व्यवहार, रूचि और कर्मों से अधिक दिखाई पड़ता है,, इस स्वतंत्रता दिवस पर अपनी आदतों का मूल्यांकन करें और देश के लिए अच्‍छे इंसान बनने की पहल शुरू कीजिए..करेगे क्या आप एक अच्छी पहल ?