शनिवार, 18 अगस्त 2012

अल्पसंख्यक हिंदुओं की त्रासदी

सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम को जीवन का आधार मानने वाले हिंदुओं की स्थिति उन देशों में काफी बदतर है जहां वे अल्पसंख्यक हैं...! भारत से बाहर रह रहे हिंदुओं की आबादी लगभग 20 करोड़ है! सबसे ज्यादा खराब स्थिति दक्षिण एशिया के देशों में रह रहे हिंदुओं की है! दक्षिण एशियाई देशों-बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ फिजी, मलेशिया, त्रिनिदाद-टौबेगो में हाल के वर्षो में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार के मामले बढ़े हैं। इनमें जबरन मतांतरण, यौन उत्पीड़न, धार्मिक स्थलों पर आक्रमण, सामाजिक भेदभाव, संपत्ति हड़पना आदि शामिल है... कुछ देशों में राजनीतिक स्तर पर भी हिंदुओं के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आई है... हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है..यह रिपोर्ट 2011 की है, जिसे हाल ही में जारी किया गया है... रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे.. अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी की मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है क्यों  ? वहां गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा हैक्यों ? 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया क्यों ? स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है जबकि भारत में किसी भी धर्म की सिक्षा अनिवयार्य नहीं है फिर पाक में ईस निंदा कानून क्यों ?  गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता हैक्यों ? जनजातीय बहुल इलाकों में अत्याचार ज्यादा हैक्यों ? इन क्षेत्रों में इस्लामिक कानून लागू करने का भारी दबाव है..किसके इशारे पर ? हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैंज ज्यादा सुरक्षित है अल्पसंख्यक होने के बाद भी ....बकि भारत में मुस्लिम और अन्य धर्म के लोग  उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है... गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है...
इसी तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर अत्याचार के मामले तेजी से बढ़े हैं....बांग्लादेश ने वेस्टेड प्रापर्टीज रिटर्न [एमेंडमेंट] बिल 2011 को लागू किया है, जिसमें जब्त की गई या मुसलमानों द्वारा कब्जा की गई हिंदुओं की जमीन को वापस लेने के लिए क्लेम करने का अधिकार नहीं है ! इस बिल के पारित होने के बाद हिंदुओं की जमीन कब्जा करने की प्रवृति बढ़ी है और इसे सरकारी संरक्षण भी मिल रहा है... इसका विरोध करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर भी जुल्म ढाए जाते हैं.. इसके अलावा हिंदू इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर भी हैं..उनके साथ मारपीट, दुष्कर्म, अपहरण, जबरन मतांतरण, मंदिरों में तोड़फोड़ और शारीरिक उत्पीड़न आम बात है!अगर यह जारी रहा तो अगले 25 वर्षो में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी ही समाप्त हो जाएगी...और भारत में मुस्लिमो की आवादी कितने हो जाएगा विचार करे ................
बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी देश कहे जाने वाले भूटान में भी हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार हो रहा है....1990 के दशक में दक्षिण और पूर्वी इलाके से एक लाख हिंदू अल्पसंख्यकों और नियंगमापा बौद्धों को बेदखल कर दिया गया.... ईसाई बहुल देश फिजी में हिंदुओं की आबादी 34 प्रतिशत है... स्थानीय लोग यहां रहने वाले हिंदुओं को घृणा की दृष्टि से देखते हैं... 2008 में यहां कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया.. 2009 में ये हमले बंद हुए.. फिजी के मेथोडिस्ट चर्च ने लगातार इसे इसाई देश घोषित करने की मांग की, लेकिन बैमानिरामा के प्रधानमंत्रित्व में गठित अंतरिम सरकार ने इसे खारिज कर दिया और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के संरक्षण की बात कही... मलेशिया घोषित इस्लामी देश है, इसलिए वहां की हिंदू आबादी को अकसर भेदभाव का सामना करना पड़ता है.... मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थानों को अकसर निशाना बनाया जाता है... सरकार मस्जिदों को सरकारी जमीन और मदद मुहैया कराती है, लेकिन हिंदू धार्मिक स्थानों के साथ इस नीति को अमल में नहीं लाती.... हिंदू कार्यकर्ताओं पर तरह-तरह के जुल्म किए जाते हैं और उन्हें कानूनी मामलों में जबरन फंसाया जाता है.. उन्हें शरीयत अदालतों में पेश किया जाता है...सिंहली बहुल श्रीलंका में भी हिंदुओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है...पिछले कई दशकों से हिंदुओं और तमिलों पर हमले हो रहे हैं.. हिंसा के कारण उन्हें लगातार पलायन का दंश झेलना पड़ रहा है...हिंदू संस्थानों को सरकारी संरक्षण नहीं मिलता है.. त्रिनिदाद-टोबैगो में भारतीय मूल की कमला परसाद बिसेसर के सत्ता संभालने के बाद आशा बंधी है कि हिंदुओं के साथ साठ सालों से हो रहा अत्याचार समाप्त होगा....इंडो-त्रिनिदादियंस समूह सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी सहायता से वंचित है... हिंदू संस्थाओं के साथ और हिंदू त्यौहारों के दौरान हिंसा होती है.................
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार का भी जिक्र है...कश्मीरी पंडितो के साथ क्या क्या जुर्म धाये गए सभी को पता है ..... पाकिस्तान ने कश्मीर के 35 फीसदी भू-भाग पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है.. 1980 के दशक से यहां पाकिस्तान समर्थित आतंकी सक्रिय हैं ! कश्मीर घाटी से अधिकांश हिंदू आबादी का पलायन हो चुका ह...तीन लाख से ज्यादा कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं....क्यों ? कश्मीरी पंडित रिफ्यूजी कैंप में बदतर स्थिति में रहने को मजबूर हैं... यह चिंता की बात है कि दक्षिण एशिया में रह रहे हिंदुओं पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन चंद मानवाधिकार संगठनों की बात छोड़ दें तो वहां रह रहे हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाला कोई नहीं है...जिस तरह से श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर अमेरिका, फ्रांस और नार्वे ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में प्रस्ताव रखा और तमिल राजनीतिक दलों के दबाव में ही सही भारत को प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालना पड़ा उसी तरह की पहल भारत को भी दक्षेस के मंच पर तो करनी ही चाहिए..
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नोट ---ब्लॉग अभी अधूरा है ......

शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

धर्म या मज़हब ही है सिखाता आपस में बैर रखना…?????

क्या हम इस प्रकार से एक दुसरे की धार्मिक भावनाओं का ख्याल नहीं रख सकते ?
क्या हम इस तरह प्रेम से नहीं रह सकते ?
बेकुसूर लोगो को इस तरह से खात्मा करने का हक़ किसने दिया इन्हें ?
किसी का घर  उजाड़ने का हक़ किसने दिया इन्हें ?
आग लगाकर यू तमासा देख रहे है दंगाई क्या हक़ बनता है किसी का जीवन छीनने का ?
अब बताये इसमें इन शहीदों का क्या दोष था ?
शायद मैं लीग से हटकर ये बात कह रहा हूँ इसलिए हो सकता है की ये बात लोगों के गले न उतरे लेकिन केवल इसी कारण हम उन समस्याओं पे विचार करना  नहीं छोड़ सकते जो हमारे दैनिक जीवन का अंग बन गयीं हैं और इनके मूल में किसी न किसी तरह और कहीं न कहीं धर्म या मज़हब है ! मज़हबी फसादों या दंगो के कारण न जाने कितने ही लोगों को कहाँ-कहाँ और कब-कब जान-माल से हाथ धोना पड़ता है इसकी चर्चा करना अति आवश्यक है ! हा, सब  जानते हैं की कानपुर, अलीगढ, मेरठ, अहमदाबाद में साल दो साल में जो कुछ भी घटता है वो क्या है ?? आसाम में जो घट रहा है ओ क्या है ....? फिर इन दंगो के बिरोध में मुंबई में क्या हो रहा है क्या है ? सबको पता है  अक्षरधाम पे हमला होता है , गोधरा में रेल के डिब्बों में आग लगे जाती है और फिर पूरा गुजरात जलने लगता है इस सब के पीछे क्या कारण है ?? निश्चित ही मज़हब या साम्प्रदायिकता ! हद् तो तब हो जाती है जब दुर्गापूजा के बाद विसर्जन के लिए मूर्तियाँ ले जाते समय या मुहर्रम के समय रास्ते के लिए विवाद साम्प्रदायिक दंगे का रूप ले लेता है और कितने ही घरों को बर्बाद कर देती है…नेता आते हैं और मगरमच्छी आसू बहा कर वही करते हैं जो सदियों से चला आ रहा है – गंगा गए तो गंगादास और यमुना गए तो यमुनादास यानी जिस सम्प्रदाय में जाना उसी को साफ़ पाक बताना और उसी की श्रेष्ठता का राग अलापना ! ये राजनीति की मजबूरी है ! धर्म वो ताकत है जो इंसान को बुराई से हटाकर अच्छाई की तरफ ले जाती है तो फिर जो हो रहा है उसका क्या कारण है ?? कहा गई धर्म की अच्छाई ? निरपेक्ष दृष्टी से देखें तो मज़हब को एक हथियार बनाया जा रहा है! मज़हब या धर्म एक जूनून है जिसका सम्बन्ध मनुष्य के मस्तिष्क या तर्कशक्ति के साथ बल्कि ह्रदय एवम भावना के साथ है !जब हम कुछ बातों को अंतिम सत्य मान कर उसके पालन को ही सब कुछ मान लेते हैं तो परिणाम बहुत ही भयंकर होते हैं ! समझदार लोग तो फिर भी भावना के साथ बुद्धि और कर्त्तव्य का समन्वय बना लेते हैं परन्तु आम आदमी …. वो तो मज़हब के नाम पर मरने-मारने को उतारू हो जाता है जबकि ऐसा करने से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला ! धर्म के नाम पर जान कुर्बान करने वालो को शायद ये समझ ही नहीं होती वे किसी के उकसावे पर अपनी जान पर खेल जाने का जो जोखिम उठाते हैं वो  किसी के लिए लाभदायक नहीं है ! लोगों को यह बात तब समझ में आती है जब बहुत देर हो चुकी होती है ....इतिहास गवाह है की मज़हब एक जूनून की तरह आदमी के दिलो दिमाग पर छा कर उसे विध्वंश की ओर ले जा रहा है! बहुत पीछे जाने की जरुरत नहीं है- स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही भारत जब दो राष्ट्रों में बँट गया तो साम्प्रदायिकता की आग में ऐसे जला की विश्व इतिहास में एक भीषण नरसंघार के रूप में दर्ज हो गया ! उस टकराव का क्या कारण है ?? उत्तर है- मज़हब ! फूट डालो और राज करो की नीति सिर्फ अंग्रेजो की रही हो ऐसा नहीं है, हर देश हर समाज में इसे समय समय पर आजमाया जाता रहा है ! फूट डालने का सबसे आसान और कारगर जरिया है- मज़हब,... ये कहना की “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” एक छलावे के सिवा और कुछ नहीं... अगर ये सच होता तो क्यूँ इस गीत के रचयिता अपनी ही बात से पीछे हट गए और भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए ?? भारत और पकिस्तान का यह बटवारा कृत्रिम है..इस बटवारे के पीछे मज़हब के सिवा कोई और कारण हो तो बताइए ?? और सिर्फ भारत और पकिस्तान ही क्यूँ, हर देश का बटवारा सांप्रदायिक आधार पर ही हुआ है  ! ..एक प्रसीद्ध शायर ने कहा है -
” खुदा ने तो इंसान को बस इंसान बनाया,
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया..!!
मालिक ने तो बक्शी थी हमें एक ही धरती,
हमने तो कहीं भारत तो कहीं इरान बनाया !!
ये सच है की संप्रदाय के आधार पर राष्ट्र बटें हैं लेकिन यही मज़हब आदमी को आदमी से जोड़ता भी है  ! हमारे दिलों में इंसानियत के लिए दर्द और आदर्शों के लिए बलिदान का जज्बा भी कहीं न कहीं मज़हब की ही देन है ! मज़हब के बिना समाज या राष्ट्र की कल्पना भी बेमानी है, लेकिन जो बदरंग तस्वीर सामने आ रही है वह ये मानने पर मजबूर कर रही है की मज़हब ही है सिखाता आपस में बैर रखना….

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नोट --- ब्लॉग में जिन फोटो का उलेख किया गया है ओ सभी फोटो गूगल और फेसबुक से लिया गया है ..इनकी प्रमाणिकता की कोई जिम्मेदारी मेरे पास नहीं है .....किसी भी प्रकार के क़ानूनी प्रक्रिया में इन फोटो को प्रमाणित नहीं मन जाएगा ....