सोमवार, 19 सितंबर 2022

भूली बिसरी यादें (भाग 04)

भूली बिसरी यादें (भाग 04)
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ग्वालियर में रहते हुए मेरा हाथ करीब 80% टीक हो गया था,पर घाव पूरी तरह से नही भरा था,हाथ को कंधे के सहारे एक पट्टे में लटका रखता था । एक दिन एक पत्र मिला जिसमे मुझे वापस देवास जाने/आने का निर्देश था (यहां विस्मृत हो रहा है की पत्र गांव से आया था या देवास से मकान मालिक औलिया जी ने भेजा था,आते समय औलिया जी को घर का व ग्वालियर का पता देकर आया था) । भाई साहब ने टिकट कटवाकर ट्रेन में बैठा दिया,कुछ रू भी दिया थे पर याद नही कितना दिया था । 

देवास आकर मकान मालिक ने GBGL कंपनी का ज्वाइनिंग लेटर दिखाया और बोले ज्वाइन कर लो । (कंपनी में इंटरव्यू देते समय ओलिया जी का पता दिया था) । मकान मालिक के लडके अनिल ने मेरी सायकल टीक करवा दिया, शाम का खाना मकान मालिक के यहां खाया, सुबह 10 बजे कंपनी गया और ज्वाइन करने किए एक माह का समय मागा,हाथ के कारण । तब कंपनी का HR श्री बादशाह जी (मुस्लिम) बोले "तू तो ज्वाइन कर ले, कोई काम मत करना जब तक हाथ टीक नही हो जाए,मैं बोल दूंगा एम. सिंह (मेरे सुपरवाइजर) को । फिर भी मैं तैयार नहीं हो रहा था, हाथ के कारण तो बादशाह जी फिर बोले "फिर ये नौकरी दुबारा नही मिलेगी" । उस समय जीबीएलएल देवास की टॉप कंपनी में से एक थी । मैने ज्वाइन कर  लिया और एक हाथ से ड्यूटी करने लगा । ड्यूटी के नाम पर दिन भर बैठा रहता मशीन की आड़ में । जो मेहनत थी तो बस एक हाथ से कुल 16 km सायकल चलाने की । 

इस दौरान मकान मालिक की लडकी मनु सुबह,शाम दोनो टाइम मेरा खाना बना दिया करती, बर्तन धो दिया करती, यहां तक की मेरे कपड़े भी धोकर प्रेस कर देती । (आज भी उसके लिए ढेर सारी दुआए निकलती है दिल से) । 
भाई साहब के दिए रुपए कुछ दिन तो चले फिर राशन खत्म हो गया,तो मनु अपने घर से आटा लाकर रोटी,सब्जी बना कर दे देती । 
एक दिन सायकल पंचर हो गई, तो मनु से बोला " तेरे पास 2 रू हो तो दे मुझे" । तो बोली "क्या करोगे भैया" । उसे बताया कि मेरे पास दो रुपए भी नही है की पंचर बना लूं । तो तुरंत 05 रू लाकर दे दिया । 
 फेक्ट्री की केंटीन में कूपन इसू हो गया तो दोपहर में फेक्ट्री में ही खा लेता और सिक्योर्टी वालों की नजर बचा कर चार, पांच रोटी और सब्जी पॉलिथीन में रखकर  सायकल के केरियर में रूमाल में लपेटकर रख लेता और रूम पर ले आता, क्योंकि मुझे रोज रोज मनु द्वारा लाई गई रोटी खाना अच्छा नही लगता था । पर चोरी ज्यादा दिन नहीं चली, एक दिन सिक्योर्टि गार्ड ने पकड़ लिया रोटी लाते हुए 😭 और सिक्योरिटी आफिसर नितिन गौर जी के पास ले गया । उन्होंने रोटी रखवा लिया और बोले "अब ऐसा मत करना,कंपनी के नियम के खिलाफ है" । 
मेरा स्वाभिमानी मन विद्रोह पर उतर आया । उस दिन पहली बार मेरे मन में नौकरी छोड़कर गांव जाने का ख्याल आया । पर किराए के लिए भी रू नही थे 😭 ,कैसे आता । (मैं बहुत ही अंतर्मुखी स्वभाव का हूं, जल्दी से मेरी परेशानी किसी को नही बताता) । अगले दिन कंपनी में अग्रिम सेलरी के लिए एप्लीकेशन दिया पर मंजूर नहीं हुई । GBGL से ड्यूटी से बाहर निकला और फ्लूडोमेट कंपनी गया और 8 दिन की सेलरी मागा पर नही मिली । बहुत निराश होकर रूम  लौट कर आया । आते ही बाहर मनु खड़ी थी, मेरा उदास चेहरा देख कर पूछी "क्या हुआ भैया,आज बहुत उदास लग रहे हो" । उसे कुछ नही बोला । जब ओ बार बार पूछने लगी तो परेशानी बताया तो बहुत ही मासूमियत से बोली "बस इत्ती सी बात के लिए मुंह लटका लिए" और हंसने लगी । मैं रूम के अंदर आ गया, कुछ देर बाद मनु आई, दरवाजे से आवाज लगाया, मैंने दरवाजा खोला तो  एक पॉलिथीन मुझे पकड़ा दिया, मैने पूछा "इसमें क्या है री" । तो बोली "सिक्के है रख लो" ,और मेरी  प्रतिक्रिया जाने बिना ही चली गई । मैने पॉलिथीन खोला और सिक्के गिने तो 59 रू निकले । पहली बार मुझे उस लड़की के लिए स्नेह जगा ।। 

मनु लक्ष्मी थी,उसके दिए रू के बाद मेरी परेशानी खत्म हो गई । फिर मुझे GBGL की पहली पेमेंट मिल गई और रोटेशन बन गया । पेमेंट मिलते ही मनु के 59 रू की जगह 65 रू  लौटा दिया तो 6 रू मुझे वापस कर दिया ।
(इस भाग में कुछ बाते ऐसी है जिसे आज तक किसी को नही बताया । जैसे रोटी की चोरी वाली बात, मनु के दिए 59 रू वाली बात।)  
(शेष भाग 05 में)