मंगलवार, 16 सितंबर 2014

सोलंकी राजपूतो के उप कुल और ठिकाने



1. Balnot - बालन के वंशज Kirtipal (राजा Kumarpal के बड़े भाई) के पुत्र. वे मध्य प्रदेश में Rajatshan, Ghargaon, दही, (इंदौर के पास) में Dharmraj में टोडा, Tordi में रहते हैं.
2. Mehalgota - बालन, Mahelu के चौथे वंश के वंशज. उनकी जागीर Kekadi (अजमेर) था.
3 Kherada -. Bheem (बालन के 4 वंशज) के वंशज इस प्रकार Kherada कहा जाता है, Jahajpur (मेवाड़) में Kherada के क्षेत्र पर शासन किया. Mandalgadh किला चित्तौड़ पर अकबर के अभियान के दौरान उनके कब्जे में था.
. 4 Nathawat - बालन, Nathaji की 9 वीं descdendant की सन्तान. ज्यादातर वे बूंदी राज्य में Jagirs धारण कर रहे हैं. मुख्य thikanas Patanra, Naingaon, Hungori हैं. वे बूंदी न्यायालय के Davi Misal में सीटों (बाएँ सीटें) कर रहे हैं.
5 Veerpura -. बालन के 3 वंशज Lunawada (ब्रिटिश कब्जे के दौरान 9 तोपों की सलामी) की रियासत की स्थापना की जो Veerbhanu था. Lunawada अलावा, Veerpura सोलंकी Pawagadh, Sutrampur, राधनपुर की जागीर रखती है.
6 Bhojawat -. 7 पीढ़ियों के प्रत्यक्ष खून में गुजरात के राजा Tribhuvanpal द्वितीय, के प्रत्यक्ष वंशज. त्रिभुवन की 7 पीढ़ी के बाद, भोज राजपूताना में सत्तारूढ़, राजा बन गया. उसके वंश Bhojawat Solankis हैं. यह गुजरात के शासन के बाद अस्तित्व में जो सबसे शक्तिशाली हावी और प्रसिद्ध उप कबीले है. मेवाड़ में Solankis की Thikanas के अधिकांश Bhojawat Solankis के हैं.
1. Shankarot - भोज के परपोते, शंकर सिंह Jhilwara का ठिकाना प्रदान की गई थी. उसके वंश Jhilwara और मेवाड़ में कई अन्य गांवों में रहते हैं.
2. SavantSinghot - शेखर सिंह के छोटे भाई पंडित सिंह था. उन्होंने Desuri और उसके descdendant का ठिकाना Savantsinghot हैं प्रदान की गई थी. Patvi ठिकाना Roopanagar, बडा 32 मेवाड़ के Thikanas और भी ohter Thikanas Jojawar और मेवाड़ और मारवाड़ में कई अन्य गांवों में से एक है.
3. KhetSinghot - SavantSingh का पुत्र खेत सिंह था. उन्होंने Balisa की लड़ाई में निधन हो गया था.उसके वंश Siryari दिए गए लेकिन उस मारवाड़ बलों द्वारा लिया गया था और वे Sansari और मणि का ठिकाना दिए गए.
4. HamirSinghot - SavantSingh के बेटे, Hamir सिंह के वंशज. वे Somesar में रहते हैं.
5. Dela - सावंत सिंह के बेटे, Dela मालवा में Javara में अपने क्षेत्र की स्थापना की. अपने खिताब रावत और उसके वंश मालवा में Abarwada की जागीर, Khojan खेड़ा, आलोट और Khadgun पकड़ रहे था.
भोज के दूसरे पुत्र Gauda था. Gauda के पुत्र सुल्तान सिंह, Panarwa पर कब्जा कर लिया. उनके वंशज हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ के इतिहास में और महाराणा प्रताप की मदद करने के लिए प्रसिद्ध है जो आर पंजा, था. उन्होंने यह भी Augana की Bhom की जोत है.

7 Baghela -. सारंग (राजा Bhimdev का बेटा - आई) के वंशज Baghelas हैं. वे रीवा की पूंजी के साथ BaghelKhand के क्षेत्र पर शासन किया. Baghels से कई लोकप्रिय thikanas बारां, Churhat, रामपुर, ताल, Chamu, Itavan, देवरा, Solagpur, Nigvani, Jaitpur, Chandiya, बैकुण्ठपुर, कल्याणपुर, (ये मेरा  ठिकाना यानी जागीर है ) मेहसाणा, Ranpura और Devgadh हैं.! 
  Malra, Khodera, Bhangota, Kathwad, Tejawat, Barwasian, Bharsunda, Salawat, बेडा, Uniyariya, Halawat, Chajawat, Bahela, Modawat, Karmawat, Amawat, Katariya, Tatawat, Surjanpota, Banveerpota, Achalpota, Rawatka, Khinyawat, Harrajot, Bairisalot, Baghawat, Gangawat, Balramot, Kamawat, Narhardasot, Rudraka, Vishnuka, Jagganathka, Madhodaska, Dayaldaska, Jagrupka, Kalacha, भले सुल्तान, Swarnman, भुट्टा, Bhureva, Kalmer, Solake, Tantiya, Peethapur, Sojathiya, Togaru, Beeku.
jay maa khimaj rani

सोमवार, 15 सितंबर 2014

मानो वे सरकारी मकानों का सुख भोगने के लिए ही राजनीति में आए हों ?

लानत है ऎसे नेताओं पर जो दिल्ली में एक अदद सरकारी मकान के लिए समूची राजनीतिक बिरादरी को शर्मसार करने से बाज नहीं आते। देश को कानून का पाठ पढ़ाने और संसद में बैठकर कानून बनाने वाले ऎसे राजनेता, राजनीति पर किसी धब्बे से कम नहीं माने जा सकते। लोकसभा के चुनावी नतीजे आने के चार महीने बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं करने वाले पूर्व मंत्रियों व सांसदों की नजर में शायद नियमों व कानून की कोई कीमत है ही नहीं। लोकसभा के लिए चुनकर आए नए सांसद एक तरफ मकान आवंटन के लिए भटक रहे हैं तो दूसरी तरफ पूर्व सांसद मकानों से चिपके रहने में ही अपनी शान समझते हैं।
''मानो वे सरकारी मकानों का सुख भोगने के लिए ही राजनीति में आए हों''।  दिल्ली में पूर्व मंत्रियों-सांसदों के आवास की बिजली-पानी बंद करके सरकार ने इस बार जो कदम उठाया है वह प्रशंसनीय है। जरूरत अभी और सख्त कदम उठाने की है। होना तो ये चाहिए कि ऎसे राजनेताओं के खिलाफ सरकारी सम्पत्ति पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज कराया जाए और उनके खिलाफ अदालत में मामला चलाया जाए । साथ ही बाजार दर से अब तक का बकाया किराया और बिजली-पानी का बिल वसूल किया जाए। ऎसे मामलों में जब तक एकाध राजनेता को सजा नहीं होगी, तब तक सुधार की गुंजाइश नजर नहीं है। सिद्धांतों की राजनीति की दुहाई देने वाले राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं से भी अपेक्षा की जाती है कि ऎसे नेताओं के खिलाफ वे भी कार्रवाई की पहल करें मोदी सरकार ।