सोमवार, 10 जून 2013

राजनाथ सिंह की सफलता ?

भाजपा की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद मोदी ने कहा, ‘मैं पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के प्रति बहुत कृतज्ञ हूं कि उन्होंने न केवल मुझे नयी जिम्मेदारी सौंपी है बल्कि कार्यकर्ताओं और देश की जनता के सामने बहुत सम्मान भी दिया है.’ मोदी ने कहा, ‘राजनाथ जी बोलने के लिए खड़े हुए और मुझे बैठने को कहा. बाहर जो लोग बैठे हैं उनके लिए इसके महत्व को समझना कठिन है. कोई व्यक्ति केवल पद होने पर ऐसा नहीं करता बल्कि उसके लिए बड़ा दिल होना भी जरूरी है. इसे दरियादिली कहते हैं, जो पार्टी अध्यक्ष ने दिखाई.’ मोदी ने इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन माना जा रहा है कि ऐसी टिप्पणी करके उन्होंने आडवाणी और कुछ अन्य नेताओं की ओर इशारा किया जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हुए.।
         हमारे देश में कई लोगो को ही नहीं बल्कि कई पार्टियों को यह सक ,.नरेन्द्र मोदी  को  बीजेपी पार्टी की चुनाव सिमित का प्रमुख बनाया है जिसमे की नरेन्द्र मोदी  की जीत हुई है पर सिक्के का दुसरा पहलु भी है।  आडवाणी और नरेंद्र मोदी के बीच के संभावित रिफ्ट का फायदा उठाकर राजनाथ सिंह की यह सियासी जीत है। ऊपर से जो नरेंद्र मोदी की जीत लग रही है, उनका उभरना लग रहा है, वह वास्तव में राजनाथ सिंह की सफलता है। नरेंद्र मोदी का बीजेपी में अहम स्थान तो होना ही था, उन्हें एक किसी औपचारिक पद पर लाकर कार्यकर्ताओं को खुश करना ही पड़ता। राजनाथ सिंह इन दो तथ्यों को लेकर ही आगे बढ़े। आडवाणी कहते रहे कि इस बार और नरेंद्र को वेटिंग में रखा जाए, फिर अगला चुनाव उन्हें दे देंगे। किंतु कांग्रेस की नाकामयाबियों के चलते देश के फेवर टू अदर्स माहौल का फायदा भी तो उठाना है। इसे फेवर टू बीजेपी बनाना है, तो स्ट्रोंग फैसले करना होंगे। राजनाथ सिंह ने इस बात का पूरा ख्याल रखा। अब जब मोदी मैदान में हैं, प्रचार कमेटी के जरिए कार्यकर्ताओं के सीधे संपर्क में रहेंगे, तो राजनाथ सिंह को दो बड़े फायदे मिलेंगे, पहला तो उनके सांगठनिक नेतृत्व में पार्टी जीतेगी, तो दूसरा मोदी सौ फीसदी मेजोरिटी नहीं ला पाएंगे, तब कुछ सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में मोदी के नाम से देश के आधे से ज्यादा तथाकथित सेकुलर साथ नहीं आएंगे और अगर आएंगे तो अनअफोर्डेबल कंडीशन के साथ फिर क्या, ऑप्शन है ? आडवाणी ? तो राजनाथ सिंह यहां पर अपने दोनों ही मकसदों में कामयाब हुए हैं, एक तो मोदी को आगे बढ़ाने में और आडवाणी को मुकम्मल तौर पर किनारा करने में। चूंकि जब ढफली बजेगी कौन है सेकुलर या कौन है भाजपा में सर्वग्राह्य आदमी, तो खोज की सुई आडवाणी पर नहीं राजनाथ सिंह पर रुकेगी। अगर अभी आडवाणी भी मोदी-मोदी कर रहे होते, तो वे पीएम की रेस में सबसे आगे होते। इसलिए एक अध्यक्ष के रूप में राजनाथ सिंह इस रिफ्ट को बढ़ाना ही चाहते थे।
         मोदी तो परीक्षाएं ही देते रह जाएंगे, पहली तो गुजरात में लगातर साबित करते रहने की, दूसरी नवीनतम 6 लोस एवं विस चुनावों में सफलता, तीसरी पार्टी में कोई औपचारिक रूप से अखिल भारतीय स्तर की 2014 के लोस चुनावों से जुड़ी जिम्मेदारी पाने की, चौथी परीक्षा बेहद कठिन पार्टी की जो सीटें एंटी इंकंबेंसी फैक्टर और कांग्रेस की खराब छवि के चलते आनी हैं उनसे वे कितना ज्यादा ला सकते हैं, पांचवी कम पड़ गईं सीटों का गणित वे कैसे बिठाएंगे, छठवीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर अमेरिकी नकारात्मक रुख को वे कैसे चेंज करेंगे, सातवीं परीक्षा मोदी की वह होगी जिसमें वे लोगों की महा अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे, चूंकि अब लोगों को शांतिपूर्ण कैंडल मार्च, लालकिले पर प्रर्दशन की लपक लग चुकी है, फिर चाहे सरकार का मुखिया मनमोहन हों या मोदी। यूं भी नेवर वोट कॉस्टिंग पार्टिसिपेंट्स वोकेल ऑन इंटरनेट स्पेस प्रोटेस्टर्स के ऊपर यह ज्यादा दबाव है कि वे प्रो बीजेपी हैं, तो वे कुछ अनावश्क मुद्दों पर भी नई सरकार को घेरेंगे। देखिए परीक्षाओं की इतनी सीढिय़ां अगर कोई चढ़ सकता है तो वह बेशक नेता है और फिर सर्वस्वीकार्य है ही । अब यह नेता 2014 के लोकसभा चुनाव में क्या कारनामा दिखाते है यह इन्तजार करना होगा
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गुरुवार, 6 जून 2013

!! RSS में ऐसा क्यों ?

सुप्रभात ....!!!
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क्रम -- पद - - - नाम - - - वर्ण

१. सरसंघचालक - - के.एस.सुदर्शन - - ब्राह्मण

२. सरकार्यवाह - - मोहनराव भागवत - ब्राह्मण

३ सह सरकार्यवाह - मदनदास. - - ब्राह्मण

४. सह सरकार्यवाह - सुरेश जोशी - - ब्राह्मण

५. सह सरकार्यवाह - सुरेश सोनी - - वैश्य

६. शारिरीक प्रमुख - उमाराव पारडीकर - - ब्राह्मण

७. सह शारीरिक प्रमुख - के.सी.कन्नान - - वैश्य

८. बौध्धिक प्रमुख - - रंगा हरि - - - ब्राह्मण

९. सह बौध्धिक प्रमुख - मधुभाई कुलकर्णी - - ब्राह्मण

१०. सह बौध्धिक प्रमुख - दत्तात्रेय होलबोले - - ब्राह्मण

११. प्रचार प्रमुख - - श्रीकान्त जोशी - - - ब्राह्मण

१२. सह प्रचार प्रमुख - अधिश कुमार - - - ब्राह्मण

१३. प्रचारक प्रमुख - एस,वी. शेषाद्री ब्राह्मण

१४. सह प्रचारक प्रमुख - श्रीकृष्ण मोतिलाग - - ब्राह्मण

१५. सह प्रचारक प्रमुख - सुरेशराव केतकर - - ब्राह्मण

१६. प्रवक्ता - - राम माधव - - ब्राह्मण

१७. सेवा प्रमुख - प्रेमचंद गोयेल - - वैश्य

१८. सह सेवा प्रमुख - सीताराम केदलिया - - वैश्य

१९. सह सेवा प्रमुख - सुरेन्द्रसिंह चौहाण - - क्षत्रिय

२०. सह सेवा प्रमुख - ओमप्रकाश - - ब्राह्मण

२१. व्यवस्था प्रमुख - साकलचंद बागरेचा - - वैश्य

२२. सहव्यवस्था प्रमुख - बालकृष्ण त्रिपाठी - - ब्राह्मण

२३. संपर्क प्रमुख - हस्तीमल - - वैश्य

२४. सह संपर्क प्रमुख - इन्द्रेश कुमार - - ब्राह्मण

२५. सभ्य - - राघवेन्द्र कुलकर्णी ब्राह्मण

२६. सभ्य - - एम.जी. वैद्य - - ब्राह्मण

२७. सभ्य - - अशोक कुकडे - - शुद्र

२८. सभ्य - - सदानंद सप्रे - - ब्राह्मण

२९. सभ्य - - कालिदास बासु ब्राह्मण

३०. विशेष आमंत्रित सूर्य नारायण राव - - ब्राह्मण

३१. विशेष आमंत्रित - श्रीपति शास्त्री - - ब्राह्मण

३२. विशेष आमंत्रित - वसंत बापट - - ब्राह्मण

३३. विशेष आमंत्रित - बजरंगलाल गुप्ता - - वैश्य

(स्त्रोत-आरएसएस डॉटकॉम इंटरनेट पर आधारित-२००४)