सोमवार, 7 मई 2012

!! मुसलमानों का शातिर दुश्मन ?

किसी एक ग्रुप के भीतर अगर आपको किसी एक व्यक्ति की मिट्टी पलीद करनी हो, तो दो तरीक़े होते हैं। पहला, आप उसके ख़िलाफ़ सही या ग़लत, किसी भी तरह के मसले पर दुष्प्रचार करें और उसे सबके लिए घृणा का पात्र बना दें। लेकिन इस रास्ते के अपने जोखिम हैं। क्योंकि जैसे ही आप किसी के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार करना शुरू करते हैं, आपके विरोधी उसके स्वाभाविक मित्र बन जाते हैं और फिर जो तटस्थ होते हैं, वह भी आपके चरित्र का विश्लेषण शुरू कर देते हैं।

तो इस काम के लिए दूसरा तरीक़ा ज़्यादा प्रभावी हो सकता है। आप पहले उस व्यक्ति के मित्र बन जाइए। फिर पूरे ग्रुप को यह भरोसा दिला दीजिए कि आपसे बड़ा उसका कोई शुभचिंतक नहीं है। इसके बाद आप ग्रुप को और उसमें सबसे ज़्यादा सम्मानित व्यक्तियों को अपने 'मित्र' की तरफ से ग़ालियां देना शुरू कर दीजिए और ग्रुप के श्रद्धेय प्रतीकों का अपमान करना शुरू कर दीजिए। कुछ ही दिनों में आपका 'मित्र' पूरे ग्रुप में घृणा का पात्र बन जाएगा।


जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने भारत के मुसलमानों की मिट्टी पलीद करने के लिए यही दूसरा रास्ता अपनाया है। उन्हें मुसलमानों का कितना समर्थन और भरोसा हासिल है, ये तो पता नहीं, लेकिन देश की सबसे प्राचीन और विख्यात मस्जिदों मे से एक के इमाम होने के कारण मीडिया और राजनेताओं के दरबार में इन्हें बहुत महत्व दिया जाता है। इनके पूज्य पिताजी ने एक बार सुप्रीम कोर्ट के उनके खिलाफ़ समन जारी करने को चुनौती देते हुए देश के सबसे बड़े न्यायालय को पागल क़रार दिया था और कोर्ट उनका कुछ नहीं बिगाड़ सका था।


ये मुसलमानों की रहनुमाई का दावा करते हैं और इसी बूते उन्होंने अण्णा के आंदोलन को मुस्लिम विरोधी क़रार देते हुए क़ौम को इससे दूर रहने की सलाह दी है। इनका कहना है कि भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे इस्लाम विरोधी हैं। इनसे कोई पूछे कि आज़ादी की लड़ाई में ये दोनों ही नारे केंद्र में रहे थे। तो क्या भारत की स्वतंत्रता का पूरा आंदोलन भी इस्लाम विरोधी था? बुखारी के इस मूर्खतापूर्ण बयान से क्या मुस्लिम इस देश की मुख्यधारा से कटे हुए नहीं प्रतीत होते हैं? वैसे भी यह कोई मज़हबी आंदोलन तो है नहीं कि इसमें किसी व्यक्ति को पूजा पद्धति के आधार पर अपना रुख तय करने की ज़रूरत हो।


यह आंदोलन विशुद्ध तौर पर एक सामाजिक आंदोलन है। इसलिए कोई भी व्यक्ति जो इसे मुसलमानों, पिछड़ों, दलितों या किसी भी दूसरे वर्ग के आधार पर समर्थन या विरोध का आह्वान कर रहा है, वह उस क़ौम का सबसे बड़ा दुश्मन है। रही भारत माता या वंदे मातरम नारे की बात, तो यह तो निजी विश्वास का मसला है। मैं हिंदू हूं और सनातन काल से यह देश मेरी मां है। यह मुझे मेरी पूजा पद्धति ने नहीं, मेरे खून में हज़ारों साल से बहते मेरे संस्कारों ने सिखाया है। यही खून इस देश के 20 करोड़ मुसलमानों की नसों में भी बह रहा है। चाहे लोभ से या भय से या फिर कुछ अन्य सामाजिक कारणों से, जब इन मुसलमानों के पूर्वजों ने इस्लाम अपनाया, तो उन्होंने अपनी पूजा पद्धति बदली, अपने श्रद्धा केंद्र बदले और प्रेरणा पुरुष बदले, लेकिन उनकी नसों में आज भी अपने हिंदू पूर्वजों का ही खून है। इसलिए यह देश उनकी भी मां ही है।


बुखारी सरीखों का मानना है कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत करना कुफ्र है, इसलिए भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे इस्लाम विरोधी हैं। पहली बात तो यह कि किसी की जय करना उसकी इबादत करना नहीं होता है और संस्कृत की प्राथमिक जानकारी रखने वाला भी यह बता देगा कि वंदना का अर्थ हमेशा पूजा के तौर पर नहीं होता है। इसके बावजूद अगर इन दोनों नारों से बुखारी को परेशानी है, तो ये नारे लगाना अण्णा के आंदोलन की कोई पूर्व शर्त नहीं हैं। इससे ऐसे तमाम वामपंथी जुड़े हैं, जो जन्म से भले हों, मन से कत्तई हिंदू नहीं हैं। तो बुखारी मुसलमानों के लिए कुछ नए नारे दे सकते थे। लेकिन वह ऐसा करेंगे नहीं।


इसके बजाए वह मुसलमानों को पूरे देश के सामने खलनायक और देशविरोधी साबित करना चाहते हैं। क्योंकि तभी समाज उनके खिलाफ़ प्रतिक्रिया देगा और केवल तभी वह मुसलमानों को बता सकेंगे कि 90 करोड़ हिंदू तुम्हें खाना चाहते हैं और तुम केवल तभी सुरक्षित रह सकोगे, जब मेरी छत्रछाया में रहोगे। क्योंकि अगर देश का मुसलमान अण्णा के साथ खड़ा हो गया और उसने अपनी मज़हबी पहचान की ज़िद छोड़ दी, तो बुखारी की नेतागिरी का क्या होगा। तो अब गेंद मुस्लिम समाज के पाले में है। उसे ही यह तय करना है कि वह देश की मुख्यधारा में बहने को तैयार है या अपने क़ौम के इस शातिर दुश्मन की गोद में खेलने को। इस सवाल का जवाब तय करेगा कि भारत के भविष्य का इतिहास भारतीय मुसलमानों को किस पन्ने पर रखता है।

शनिवार, 5 मई 2012

!! RSS और हिन्दुओ को फ़साने के सद्यन्त्र का पर्दाफाश!!!

हैदराबाद के हिन्दू विरोधी दंगो में RSS और हिन्दुओ को फ़साने के सद्यन्त्र का पर्दाफाश!

मित्रो, आज आपको एक साफ़ साफ़ सद्यन्त्र दिखाते है की किस प्रकार से कांग्रेस,MIM, भर्स्ट मीडिया मिलकर RSS और हिन्दुओ को बदनाम कर रही है। हैदराबाद में 1अप्रैल को रामनवमी के मनाने के बाद ही MIM समर्थंक मुस्लिम ने चेतावनी दे दी... थी की हिन्दू दंगो के लिए तैयार रहे। उसके बाद 8 अप्रैल को मुस्लिमो ने गौमाता का मांस हनुमान मंदिर में फेक दिया और मंदिर में हरा रंग फेक दिया। उसके बाद जब हिन्दुओ ने विरोध प्रदर्शन किया तो पहले से तैयार मुस्लिम ने हिन्दुओ को तलवार वगरह से मारा, 90% लोग जो घायल हुए वो हिन्दू ही थे।

पहले मीडिया ने कहा की कोई गौ मांस या हरा रंग नहीं फेका गया है यह झूट है।उसके बाद पोलिस ने 4 हिन्दुओ को RSS का सदस्य कहकर गिरफ्तार कर लिया और उन लोगो से बयान दिलवाया की उन RSS के सदस्यों ने ही दंगा सुरु करने के लिए मंदिर में गौ मांस फेका था। उसके बाद सारे मीडिया चैनल और न्यूज़ पेपर यह दिखाते रहे
की हिन्दुओ ने ही अपने से मंदिर में गौ माता का मांस फेक कर दंगा सुरु किया। सारा दोष RSS, बजरंग दल और हिन्दुओ पर मढ दिया।

इस विडियो में देखे की हरा रंग मंदिर में कैसे फेका गया था:
http://www.youtube.com/watch?v=30sk2ddd_Zw

इन दोनों विडियो में देखे की किस तरह से गौ मांस मंदिर में फेका गया:
http://www.youtube.com/watch?v=agZ1ercP8OE
http://www.youtube.com/watch?v=8LNKbUnXU44

लेकिन 3 मई 2012 को thehindu न्यूज़ पेपर ने रिपोर्ट दिखाई जीसमे मुख अभुयुत्क (कहने को RSS के सदस्य) नागराजू ने कोर्ट में कहा की पोलिस ने जबरदस्ती 5 दिनों तक मार मार कर उनसे झूठा बयांन दिलवाया और न्यूज़ पेपर ने नागराजू की पिक्चर भी दिखाइ, जिमसे साफ़ साफ़ उसके हांथो पर लगे हुए चोट दिख रहे थी।
नागराजू अपने हाथ भी नहीं उठा पा रहे थे।
http://www.thehindu.com/todays-paper/article3378543.ece

उसके बाद 4 मई 2012 को एक मुस्लिम अखबार "सियासत डेली" ने खबर छापी की RSS के सदस्यों को मुस्लिमो की प्रमुखता पसंद नहीं आये और इसलिए मुस्लिमो को बदनाम करने के लिए खुद गौ मांस फेक कर दंगा सुरु किया। उन लोगो ने वही फोटो लिया जो thehindu ने छापा था लेकिन उन्होंने पिक्चर का वो भाग काट दिया जिसमे उसके जख्मी हाथ दिख रहे थे।
http://www.siasat.com/english/news/rss-man-did-not-domination-
muslims-madannapet

मित्रो इससे बड़ा और कुछ उदाहरण नहीं हो सकता की किस प्रकार से मीम/कांग्रेस नेता, पोलिस और भर्स्ट मीडिया साथ में मिलकर हिन्दुओ को मारते है और फिर झूटी रिपोर्ट में सारा दोष RSS और हिन्दुओ पर मढ देते है। इसके बाद भी अगर RSS/बीजेपी और बाकि रस्त्रावादी सक्तिया चुप रहती है तो फिर इसमें दोष हिन्दुओ, RSS और बीजेपी का ही है। इस बात को लेकर रस्त्रावादी शक्तियों को आन्दोलन करना चाहिए और भ्रस्त मीडिया, पोलिस और नेताओ का काला चेहरा देश के सामने रखना चाहिए।

अगर बीजेपी/RSS कुछ नहीं करेगी तो इस तरह से ही हिन्दुओ की दुर्गति होती रहेगी। आज सारे सेकुलर हिन्दु मुस्लिम इस तरह की झूटे खबरों को पढ़ पढ़ कर पीड़ित हिन्दुओ को ही दोष देते रहते है। अगर आप सच्चे देशभक्त है तो उठो और इसका बिरोध करो ..जय हिंद ..जय भारत ..जय जय श्री राम....
 
नोट --ब्लॉग कॉपी पेस्ट हैं ...