शनिवार, 3 मार्च 2012

!!स्वामी रामदेव जी के फंडे पर काम करके 30 करोड नौकरियों का जुगाड मात्र 10 साल में कर सकती है !!

जब भारत की सरकार स्वामी रामदेव जी के फंडे पर काम करके 30 करोड नौकरियों का जुगाड मात्र 10 साल में कर सकती है तो वह आरक्षण के पीछे क्यों पड़ी हुई है।
पढ़िए कैसे......और अगर पसंद आये तो शेयर करें.....!!.
1. आज के दिन भारत की लाखों छोटी मोटी खिलौना बनाने वाली कम्पनियाँ इसलिय बंद हो गयी कि सरकार की तरफ से उनको न तो कोई आर्थिक मदद मिली न तकनीकी, यदि 100 का औसत पकडें तो करीब 2 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए।

2. भारत में साबुन से लेकर बनियान तक बनाने वाली 5000 विदेशी कंपनियों ने भारत का सब रोजगार (करीब 12 करोड़) विदेशो में भेज दिया है साथ ही साथ हर साल करीब 15 से 16 लाख करोड़ रुपये विदेश जा रहा है।

3. इस पर तुर्रा यह की रोज रोज एफ़डीआई को नए नए क्षेत्र में खोला जा रहा है। यदि खुदरा में भी एफ़डीआई खोल दिया जाये तो भारत का 12 करोड़ रोजगार और भारत से बाहर विदेशो में पैदा होगा जिससे भारत के लोग और बेरोजगार होंगे।

4. स्वामी रामदेवजी ने कितने लोगो को स्थाई रोजगार अपने योग और आयुर्वेद के बल पर दिया है इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इनके हर आरोग्य केंद्र पर 5 से 6 लोगों को नौकरी मिल रही है। एक एक जिले में 2 से 4 ऐसे केंद्र हैं और भारत में 628 जिले हैं। इसके बाद इनका उत्पाद बेचने वाले हर दूकान पर 2 से 4 लोगो को नौकरी मिली हुई है और यह आरोग्य केंद्र अब हर गाँव में खोलने की योजना है।

तो सोचिये मात्र देशी चीजों से कितना रोजगार पैदा होगा। पतंजलि योगपीठ में भी शायद 8000 लोग नौकरी करते है। यदि गाय- खेती-योग-आयुर्वेद की चौकड़ी पर ध्यान दिया जाये तो इससे कम से कम 5 करोड रोजगार मात्र 3 साल में पैदा हो जायेगा तथा विदेशियों पर निर्भरता कम हो जायेगी।

5. जिस तरह से अमेरिका भारत को तेल को लेकर परेशानी में डाल रहा है, स्वामी रामदेव जी की चले तो गौ हत्या बंद करवाकर उसी गोबर गैस को सिलिंडर में भर कर गाड़ियों में सीएनजी जैसा उपयोग किया जाये और हर घर पर 200 वाट का सोलर पैनल दिखे।

6. वकीलों की जमात कांग्रेस सरकार अंग्रेजो की तरह ही 500 रुपये और 5 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को बराबर मानकर पहले 500 रुपये वाले को जेल भेजती है बाद में जनता को आरक्षण और कुशवाहा जैसे मामलों में उलझाकर महत्वपूर्ण समय बिताकर इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन से जीत हासिल कर लेती है। कलमाड़ी, कनिमोझी जैसे सेकड़ों हजारों करोड़ के भ्रष्टाचारी देशद्रोही जमानत पा लेते हैं और 500 रूपये वाला जेल में सड़ रहा होता है।

ये अब किसी भी हालत में खत्म होना चाहिए और राष्ट्रभक्तों की जमात पहले देश चलाये फिर दुनिया...अब भारत को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो भारत के अंतिम व्यक्ति की सोचे, समान और मुफ्त शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराये, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाये और न्याय व्यवस्था भी सुधारे। वर्तमान में न्याय के नाम पर सिर्फ फैसले सुनाये जा रहे हैं और विदेशी न्याय व्यवस्था के कारण देश में अपराध बढ़ रहे हैं...!!

जागो भारतियों जागो...!!
जय भारत स्वाभिमान !
जय स्वामी रामदेव जी !!
जय हिंद !! जय भारत !! वन्देमातरम !!

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

।। शंबुक वध कि असलियत ।।


.कई बार एसा हुआ है कि हिन्दू धर्म के विषय में कुछ
... लोगों ने मह्रिषी शम्बूककी हत्या (श्री राम के
द्वारा ) की बातकरके मुझे चुप रहने के लिए मजबूर
कर दिया है. मैंने भी बहुत सोचा कि जिस राम
कि हम पूजा करते हैं ,जिनकोएक आदर्श पुरुष मानकर
पूरा भारत पूजताहै,वे इतने निर्दयी कैसे हो सकते हैं
कि बिना किसी कारन एक शम्बूक का वध केवल
मात्र इसलिए कर दें कि शम्बूक शुद्र थे.
सर्वप्रथम तो में यहाँ पर एक बात अवश्य
बताना चाहूँगा कि यह प्रसंग
भव्भूती द्वारा रचित उत्तर रामायण के तृतीय
चरण में शम्बूक वध में आता है. और यह काव्य रूप में है.
काव्य में भावार्थ निकाला जाता है,और
हजारों वर्ष पूर्व रचित उत्तर रामायण
का भावार्थ कोई ज्ञानी पंडित ही लिख सकताहै.
मै भी कुछ लोगों से मिला. शम्बूक वध कोकई
ब्लोगों में पढ़ा,कई पुस्तके पढ़ी, तो एक निष्कर्ष
पर पहुंचा कि इस प्रसंग को ब्रह्मण व शुद्र
का प्रसंग बताने वाले या तो महामूर्ख हैं
या फिरदेशद्रोही.
शम्बूक वध के तीसरे भाग आता है कि राम के प्रहार
से शुद्र शम्बूक का वध हो गया.राम को बदनाम
करने वाले केवल यही बात लोगों को बहकाने के
लिए कहते हैं,और दलितों का धर्मांतरण करने
वालीइसाई मिशनरियां तो इस प्रसंग की इस
घटना को और भी मसालेदार बनाकर दलितों के आगे
परोसती हैं.
वास्तव में यह प्रसंग इस प्रकार है किराम के पास
एक वृद्ध ब्रह्मण अपने १३ वर्ष के पुत्र का मृत
शरीर लेकर आता है और राम से कहता कि शुद्र
शम्बूक ने मेरे पुत्र का वध अपनी तपस्या के लिए कर
दिया है. (यहाँ ध्यानदेने योग्य बात यह है
कि शम्बूक को शुद्र इसलिए कहा गया है कि वह इक
नरबली वाला कोई अनुष्ठान कर रहा था. )
अब इसी प्रसंग की पूरी बात करते है. प्रसंग है
कि "राम शम्बूक के पास जाते हैं और उसका वध कर
देते हैं और शम्बूक एक दिव्य पुरुष के रूप में बदल
जाता है तथा अन्वेष्ट्व्यो यद्सी भुवने भूतनाथ:
शरण्य बोलता हुआ श्री राम के सामने हाथ जोड़कर
खड़ा हो जाता है और वृद्ध ब्रह्मण
को भी अपना पुत्र प्राप्त हो जाता है."
पुरे प्रसंग को पढ़कर सारा सत्य सामनेआ जाता है
कि इसका क्या भावार्थ होना चाहिए.
द्वारा -नवीन त्यागी
१- शम्बूक को शुद्र किसी जातिवाचक संज्ञा के रूप
में नहीं कहा गया है.
२- राम ने शम्बूक का वध नहीं किया, उन्होंने
शम्बूक के शुद्र रूप का वध किया और शम्बूक को अपने
वचनों से ब्रह्मण बनाया.
३- प्रसंग कहता है कि इस प्रकार वृद्ध ब्रह्मण
का पुत्र भी जीवित हो गया,यानि कि शम्बूक ने
उस वृद्ध ब्रह्मण को अपना पिता मान कर
उसकी सेवा शुरू कर दी.
४- राम ने केवल वही कार्य किया जो कि उनके
महान चरित्र के अनुरूप था.
अब आप ही बताएं कि पूरे प्रसंग की बात न करके
प्रसंग की केवलमात्र एक
पंक्तिको ही मसाला बनाकर परोसने वाले
लोगों को आप क्या कहेंगे?