शनिवार, 17 दिसंबर 2011

ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं होती है ?

 कहते हैं कि ब्रह्मा ने इस जगत की रचना की। विष्णु इस जगत का पालन करते हैं और महेश यानि भगवान शिव इस दुनिया का विनाश करते हैं। धरती पर भगवान विष्णु और शिव के तो कई मंदिर हैं। लेकिन ब्रह्मा जी के मंदिर इतने कम क्यों? पुष्कर जैसा ब्रह्मा जी का पौराणिक मंदिर कहीं दूसरी जगह कम ही देखने को मिलता है। ये एक ऐसी जगह है जहां धरती के लोग उस रचनाकार की पूजा करते हैं जिसकी वजह से इस दुनिया का अस्तित्व है।
पुष्कर का मतलब है वो तालाब जिसका निर्माण पुष्प यानि फूलों से होता है। मान्यता है कि एक बार ब्रह्मा के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का ख्याल आया। यज्ञ के लिए जगह की तलाश करनी थी। लिहाजा उन्होंने अपनी बांह से निकले हुए कमल को धरती लोक की ओर भेज दिया। वो कमल इस शहर तक पहुंचा। कमल बगैर तालाब के नहीं रह सकता इसलिए यहां एक तालाब का निर्माण हुआ। यज्ञ के लिए ब्रह्मा यहां पहुंचे। लेकिन उनकी पत्नी सावित्री वक्त पर नहीं पहुंच पाईं। यज्ञ का समय निकल रहा था। लिहाजा ब्रह्मा जी ने एक स्थानीय ग्वाल बाला से शादी कर ली और यज्ञ में बैठ गए।
सावित्री थोड़ी देर से पहुंचीं। लेकिन यज्ञ में अपनी जगह पर किसी और औरत को देखकर गुस्से से पागल हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को शाप दिया कि जाओ इस पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं पूजा नहीं होगी। यहां का जीवन तुम्हें कभी याद नहीं करेगा। सावित्री के इस रुप को देखकर सभी देवता लोग डर गए। उन्होंने उनसे विनती की कि अपना शाप वापस ले लीजिए। लेकिन उन्होंने नहीं लिया। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा।
अब इस कहानी के पीछे का प्रतीक देखिए। ब्रह्मा हिंदू मान्यता में वो देवता हैं जिनके चार हाथ हैं। इन चारों हाथों में आपको चार किताब देखने को मिलेंगी। ये चारों किताब चार वेद हैं। वेद का मतलब ज्ञान होता है। पुष्कर के इस ब्रह्म मंदिर का पद्म पुराण में जिक्र है। इस पुराण में कहा गया है कि ब्रह्मा इस जगह पर दस हजार सालों तक रहे थे। इन सालों में उन्होंने पूरी सृष्टि की रचना की। जब पूरी रचना हो गई तो सृष्टि के विकास के लिए उन्होंने पांच दिनों तक यज्ञ किया था। और उसी यज्ञ के दौरान सावित्री पहुंच गई थीं जिनके शाप के बाद आज भी उस तालाब की तो पूजा होती है लेकिन ब्रह्मा की पूजा नहीं होती। बस श्रद्धालु दूर से ही उनकी प्रार्थना कर लेते हैं।
और तो और यहां के पुरोहित और पंडित तक अपने घरों में ब्रह्मा जी की तस्वीर नहीं रखते। कहते हैं कि जिन पांच दिनों में ब्रह्मा जी ने यहां यज्ञ किया था वो कार्तिक महीने की एकादशी से पूर्णिमा तक का वक्त था। और इसीलिए हर साल इसी महीने में यहां इस मेले का आयोजन होता है। ये है तो एक आध्यात्मिक मेला लेकिन वक्त के हिसाब से इसका स्वरूप भी बदला है। कहा ये भी जाता है कि इस मेले का जब पूरी तरह आध्यात्मिक स्वरूप बदल जाएगा तो पुष्कर का नक्शा इस धरती से मिट जाएगा। वो घड़ी होगी सृष्टि के विनाश की।
हर साल एक विशेष गूंज कार्तिक के इन दिनों में यहां सरोवर के आसपास सुनाई पड़ती है जिसकी पहचान कुछ आध्यात्मिक गुरुओं को है। मान्यता ये भी है कि इन पांच दिनों में जगत की 33 करोड़ शक्तियां यहां मौजूद रहती हैं। ये शक्तियां उस ब्रह्म की उपासना के लिए आती हैं जिनकी वजह से इस दुनिया का वजूद है। इस दौरान सरोवर के पानी में एक ऐसी आध्यात्मिक शक्ति का जिक्र है जिससे सारे रोग दूर हो जाते हैं।
आजतक किसी को पता नहीं कि इस मंदिर का निर्माण कैसे हुआ। बेशक आज से तकरीबन एक हजार दो सौ साल पहले अरण्व वंश के एक शासक को एक स्वप्न आया था कि इस जगह पर एक मंदिर है जिसके सही रख रखाव की जरूरत है। तब राजा ने इस मंदिर के पुराने ढांचे को दोबारा जीवित किया। लेकिन उसके बाद जिसने भी किसी और जगह ऐसे मंदिर के निर्माण की कोशिश की वो या तो पागल हो गया या फिर उसकी मौत हो गई। भगवान ब्रह्मा के इस शहर में आकर लोगों को एक अलग आध्यात्मिक अहसास होता है। कई सैलानी तो ऐसे भी हैं जो यहां आते हैं तो यहीं के होकर रह जाना चाहते हैं।

ब्रह्माजी ने आयुर्वेद की रचना की

आज पूरी दुनिया आयुर्वेद की दीवानी है ,पर क्या अपने  कभी सोचा है,आयुर्वेद धरती पर कैसे आया ,तो लीजिये हम बतातें हैं आपको एक नायाब कहानी I सृष्टी के नियंता ब्रह्मा को जब एहसास हुआ क़ि इस धरती पर मेरी रचित जीव रचनाएँ रोग से ग्रसित होकर दुःख पा रही हैं ,तब उन्होंने आयुर्वेद की रचना की  और अपने इस ज्ञान को सूत्र रूप में दक्ष प्रजापति को दिया,दक्ष प्रजापति से यह ज्ञान देवताओं के चिकित्सक अश्विनी कुमार भाइयों को प्राप्त हुआ,जिन्होंने इस ज्ञान को देवताओं के राजा इन्द्र को दिया,इन्द्र से यह ज्ञान पृथ्वीलोक पर महर्षि भारद्वाज सशरीर लेकर आये और महर्षि भारद्वाज से अग्निवेश एवं धन्वन्तरी ऋषियों क़ी परम्पराओं के  आचार्य चरक ,सुश्रुत  एवं अन्य  को यह ज्ञान प्राप्त हुआ I  कालांतर में इन ऋषियों ने अपने अनुभवों को जोड़कर अपनी -अपनी संहिताएँ रचित की I महर्षि चरक यायावर ( घुमंतू ) ऋषि थे,उन्होंने पेड़,पौधों ,जीव ,जंतुओं से प्राकृतिक अनुभव लेकर प्राणियों में उत्पन्न रोगों को ,जानने,पहचानने एवं उनकी चिकित्सा के नुस्खे एवं  पंचकर्म जैसी   विधा को ‘काय- चिकित्सा’ के रूप में विकसित किया,जबकि महर्षि सुश्रुत ने शरीर में उत्पन्न शल्यों की चिकित्सा की विधियां विक्सित  की ,जो बाद में ‘शल्य -चिकित्सा’  के रूप में  ’क्षार-सूत्र’ आदि अनेक विधियों के माध्यम से   लोकप्रिय हुई I  ऐसे ही आचार्य वाग्भट ने आयुर्वेद के आठ अंगों में सम्पूर्ण चिकित्सा  विज्ञान को ‘अष्टांग आयुर्वेद’ के नाम से वर्गीकृत  किया I दक्षिण में ‘अष्टांग हृद्यम’ नामक ग्रन्थ आज भी अत्यंत लोकप्रिय है I  इन बड़े महर्षियों के ग्रन्थ  आज  ’वृहत्त्रयी’ के नाम से जाने जातें हैं I  ऐसे ही रोगों को पहचानने के लिए आचार्य माधव  ने माधव -निदान नामक ग्रन्थ  की रचना की I बच्चों के रोगों की  विशेष व्याख्या एवं चिकित्सा की विधियों  एवं नुस्खों को सूत्र रूप में लाने का श्रेय महर्षि काश्यप को जाता है I ऐसे ही अनेक आचार्यों  की परम्परा से मिलकर बना आयुर्वेद ,जिसमें  इंसान ही नहीं जानवरों से लेकर पेड़ पौधों तक की  चिकित्सा के अनेकों गूढ़ रहस्य एवं नायब नुस्खे मौजूद हैं ,बस जरूरत है तो रह्स्यवेधन की I




मायावती के भाई आनंद के अरबपति होने के सबूत?

http://www.swatantraawaz.com/anand_mayawati.htm
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ किरीट सौमैय्या ने गुरूवार को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार की 125 कंपनियों की जांच की मांग को लेकर कारपोरेट अफेयर्स मंत्रालय की जांच समिति और प्रवर्तन निदेशालय को प्रमाण सहित दस्तावेज सौपें। इन दस्तावेजों में कंपनियों के जरिये हुए करोडों रूपए के घपले-घोटाले और पैसे के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण दिए गए हैं।
भाजपा नेताओं ने यह पाया है कि नोएडा प्रधिकरण के भूमि आवंटन-नीलामी-टेंडर अनियमित एवं संदिग्ध है, और इससे नोएडा घोटाला, नोएडा व्यवसायिक भूमि आंवंटन घोटाला, नोएडा फार्म हाऊस घोटाला, यमुना एक्सप्रेस वे घोटाला, नोएडा ग्रुप हाऊसिंग घोटाला और ग्रेटर नोएडा भूमि घोटाला हुआ है। पत्र में भाजपा नेताओं ने मांग की कि 2007 से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार की वित्तीय स्थितियों में हुई असाधारण वृद्धि की जांच की जरूरत है। बसपा सरकार के सत्ता में आने के बाद आनंद कुमार समूह की कंपनियों की विस्तार से जांच आवश्यक है। इस समूह में आनंद कुमार उनकी पत्नी विचित्र लेखा, सुखदेव कुमार, दीपक बसंल महिपाल राघव, मिश्रा और यादव सिंह शामिल है।
भाजपा नेताओं ने दोनों विभागों को दिए पत्र में अपनी जांच पड़ताल के आधार पर सौपें गए दस्तावेजों में कहा है कि इस समूह में 125 से अधिक कंपनिया हैं, जिनके माध्यम से हजारों करोड़ रूपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इस समूह ने ऐसी छाया कंपनियों से लेन-देन दिखाया है जो या तो हैं ही नहीं, लापता हैं अथवा अवैध या अक्रियाशील हैं। दस्तावेजों के जरियें प्रमाण दिए गए की कुछ निजी कंपनियों के समूह को जिनकी पूंजी नहीं के बराबर थी, उन्हें कुछ अन्य प्राईवेट कंपनियों ने ऊंची दरों  पर खरीदा और ऐसे लेन-देन में 10 लाख के शेयर 50 करोड़ में खरीदे गए।
यह भी जानकारी दी गई है कि एक लाख रूपये की पूँजी वाली शिवानंद रीयल स्टेट प्राईवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को वीरेंद्र जैन और भूषण भारत ने 142 करोड़ में खरीदा। इन कंपनियों ने हजारों करोड़ रूपए की आय लेन-देन वायदा बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज के जरिये दिखाये हैं। करोड़ो रूपये का वित्तीय लेन-देन विभिन्न चरणों में किया गया है। भाजपा नेताओं ने दस्तावेजों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले हैं कि आनंद कुमार समूह ने 125 कंपनियों का जाल गत दो तीन सालों में फैलाया है। इस समूह में ज्यादातर ऐसी कंपनिया हैं जिनमें वास्तव में कोई व्यवसायिक गतिविधियां नहीं होतीं तथा बिना किसी व्यवहारिक व्यवसाय के हजारों करोड़, करोड़ का लेन-देन किया गया है।
पत्र में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की जाए। कंपनियों के अवैध कार्य और पैसो के लेन-देन की जांच हो, घोटाले से जुड़े कार्यो की जांच हो, सरकार को आडिट से दी गई अधूरी गलत जानकारियों की भी जांच की जाए, साथ ही आनंद कुमार और उनके समूह के प्रकरण में भी पूछताछ और जांच कर समूचित कार्रवाई की जाए। डॉ किरीट सौमैय्या के साथ सांसद प्रभुदयाल कठेरिया तथा हंसराज अहिर ने यह पत्र और दस्तावेज धनराज डायरेक्टर इन्वेस्टिगेशन एंड इंसपेक्‍शन कारपोरेट अफेयर्स मंत्रालय तथा अरूण कुमार निदेशक प्रवर्तन निदेशालय से मिलकर सौपें पत्र और दस्तावेजों की एक प्रति चैयरमैन सीबीडीटी वित्त मंत्रालय भारत सरकार को भी दी गई है।
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