आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

मंगलवार, 21 जुलाई 2015

समुद्र में विलीन श्री कृष्ण जी की द्वारिका नगरी

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जब यूरोप और अफ्रीका के लोग पूरी तरह मानव भी नहीं बने थे तथा नंगे घूम कर जानवारों को खाकर अपना पेट भरा करते थे तब भारतीय...
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शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

रीवा राजघराने का इतिहास - भाग 2 ("नैकिहाई की जूझ्झि") ।

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रीवा और नैकहाई  ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि - संसार में किसका समय है एक सा रहता सदा, है निशा-दिवा सी घूमती सर्वत्र विपदा-सम्पदा। उन्नति तथा अवनति प...
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