आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मानसून बुलाने के अजब -गजब टोटके ।

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   कहते हैं कि सर्दी, गर्मी और बारिश प्रकृति के हिसाब से आती-जाती हैं। इनमें मनुष्य कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन देश के कुछ इलाकों में प्रक...
शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

कुल मिलकर बजट 2014 में सुविधाएं सस्ती, शौक महंगा हुआ

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मैं तो समझता हू की मोदी जी को इस धारणा पर काम करना चाहिए । - "काम" पहचान बनें मेरी तो बेहतर है, चेहरे का क्या है, वो मेरे साथ...
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