आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

सोमवार, 3 जून 2013

!! वेद का शुक्त रचने वाले सूद्र !!

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वेदो के बारे मे तथाकथित दलित विचारक कहते है की वेद पढने का अधिकार कभी शुद्रो को नही था. खैर ये  क्या कहते है क्या नही कहते उससे कोई खास...

!! हिन्दू विवाह पद्धति में स्थिरिता है !!

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‘विवाह’ मानव सभ्यता का सबसे सुन्दर वरदान है ,‘समूचे विश्व में समाज की इकाई के रूप में विवाह नाम की संस्था अस्तित्व ...
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