आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

बलात्कार क्यों ?

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आप सभी को सुप्रभात ..जय हिन्द जय भारत ..जय जय श्री राम....जय श्री कृष्णा ........   बलात्कार क्यों ? संस्कारों का अभाव या कामवासना की...
बुधवार, 19 दिसंबर 2012

क्या जाति ब्यवस्था टूट रही है ?

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वैदिक काल के शुरूआती दौर में जब समाज के प्राचीन युग की कृषि दस्तकारी तथा अन्य सामाजिक कामो व पेशो का उदय हो रहा था , उस समय विभिन्न कामो ...
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