आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

देशभक्ति ?

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“ सरहदें, भौगोलिक सीमाएं इंसानियत की सबसे बड़ी दुश्मन हैं. देशभक्ति मानवता के लिए अभिशाप है. मानव निर्मित धर्मों के बाद अगर इंसानी दुनिय...
शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

!! उल्लुओ से सावधान इनके बीच सही बात कहने का कोई अर्थ नहीं..!!

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जब मैंने फेसबुक ज्वाइन किया था तो सोचा था की फेसबुक में अच्छे और बुरे इन्सान मिलेगे ..पर यह नहीं सोचा था की इस फेसबुक में उल्लुओ की भर...
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