आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

बुधवार, 5 सितंबर 2012

मनुष्य योनी ही क्यों ?

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मैं पाप और पुण्य के अवधारणा को तो नहीं मानता हु क्योकि पाप और पुन्य का फल इसी जन्म में इसी धरती पर मिलता है ..पर यदि पुनर्जन्म को म...

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१--संविधान और उसके निर्माताओं की भावना के खिलाफ:   संविधान निर्माता और दलित समाज के मसीहा माने जाने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर  और देश के ...
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