आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

शनिवार, 18 अगस्त 2012

अल्पसंख्यक हिंदुओं की त्रासदी

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सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम को जीवन का आधार मानने वाले हिंदुओं की स्थिति उन देशों में काफी बदतर है जहां वे अल्पसंख्यक हैं...! भार...
शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

धर्म या मज़हब ही है सिखाता आपस में बैर रखना…?????

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क्या हम इस प्रकार से एक दुसरे की धार्मिक भावनाओं का ख्याल नहीं रख सकते ? क्या हम इस तरह प्रेम से नहीं रह सकते ? बेकुसूर लोगो को इ...
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