आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

बुधवार, 18 जनवरी 2012

!!शिष्टाचार और संस्कार में फर्क है।!

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 शिष्टाचार का संबंध सिर्फ बाहर से और संस्कार का भीतर से जुड़ा हुआ है। इस समय ये दोनों ही बातें मानवीय जीवन में या तो कम हो रही हैं या फिर ...

!!जनेऊ धारण करने का बैज्ञानिक और सामाजिक वा धार्मिक महत्व !!

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!!!जनेऊ पहनने से क्या लाभ ? पूर्व में बालक की उम्र आठ वर्ष होते ही उसका यज्ञोपवित संस्कार कर दिया जाता था। वर्तमान में यह प्रथा लोप सी गयी...
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