आप हम और देश

इस ब्लॉग में मेरा उद्देश्य है की हम एक आम नागरिक की समश्या.सभी के सामने रखे ओ चाहे चारित्रिक हो या देश से संबधित हो !आज हम कई धर्मो में कई जातियों में बटे है और इंसानियत कराह रही है, क्या हम धर्र्म और जाति से ऊपर उठकर सोच सकते इस देश के लिए इस भारतीय समाज के लिए ? सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वें भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद दुःख भाग्भवेत।। !! दुर्भावना रहित सत्य का प्रचार :लेख के तथ्य संदर्भित पुस्तकों और कई वेब साइटों पर आधारित हैं!! Contact No..7089898907

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

कैसे लोगों के पास नहीं ठहरतीं देवी लक्ष्मी?

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तार्किक होना या बुद्धिमान होना कोई बुरी बात नहीं है। इंसान को वही बात स्वीकारनी चाहिए, जो तर्क की कसौटी पर खरी उतरे या जिसे बुद्धि स्वीकार क...

!! दलित आरक्षण के नाम पर राजनीत आखिर कब तक !!और क्यों ?

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हिन्दुस्तान का ताना-बाना प्रारंभ से ही विभिन्न जाति, धर्म, भाषाओं का रहा है। हम इतिहास के पन्नों को पलटे तो पाते है कि मनुस्मृति से कर्म आ...
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