शनिवार, 15 अक्तूबर 2022

भूली बिसरी यादें (भाग 09)


मेरे फेक्ट्री के मालिक आई. एस.गजरा की असमय मृत्यु हो गई । फेक्ट्री उनके दामाद सुरेंद्र सिंह गढ़ा के हाथ में आ गई, हालाकि सुरेंद्र सिंह फेक्ट्री में कई साल से  कार्यरत थे । पर ससुर के मरने के बाद MD बन गए और बहुत जल्द फेक्ट्री अवनति की ओर अग्रसर हो गई । मुझे आभास हो गया कि फेक्ट्री बंद होने वाली है, मैने सोसायटी में GBGL के कर्मचारियों को  बड़े लोन देना बंद कर दिया । अक्टूबर 2005 में फेक्ट्री की बिजली कट गई बिल नही भरने से । 6 महीने डीजल जनरेटर से उत्पादन हुआ, इसके बाद फेक्ट्री अघोषित रूप से बंद हो गई । कर्मचारी जाते,फेक्ट्री के अंदर ड्यूटी टाइम तक बैठते और चले आते । 
     इस परिस्थिति को समझते हुए मैने एक रिस्की/ साहसी कदम उठाया । मुख्य मार्केट में 3500/ रू प्रतिमाह पर किराए से 4 रूम 30 दिसंबर 2005 में लिया और अच्छे फर्नीचर बनवाया और  2 फरवरी 2006 को कंप्यूटर सेंटर को शिफ्ट कर दिया,फेक्ट्री जाना बंद कर दिया और ट्यूशन भी कम कर दिया और ज्यादा से ज्यादा समय प्रचार,प्रसार में लगाने लगा । रात के 12 बजे से तो सुबह 6 बजे तक दीवारों पर पोस्ट चिपकाता, कभी घर घर में पैंपलेट डालता । भयंकर ठंड में भी मैं पसीना पसीना हो जाता । 2006 का फरवरी, मार्च,अप्रैल तक में पूरे देवास को पोस्टर,पैंपलेट से पाट दिया । हर किसी के दिमाग में High Tech Computer छा गया । जैसे ही स्टूडेंट्स की Exam खत्म हुई, मेरे यहां इनक्वायरी की लाइन लग गई । अप्रैल में ही 10 कंप्यूटर की बैच सुबह 8 बजे से रात के 9 बजे तक फुल हो गई । इसके बाद भी एडमिशन लेने वालो की कमी नही आई तो तुरंत दस कंप्यूटर के लिए फिर से फर्नीचर बनवाया और 10 कंप्यूटर "PG कम्प्यूटर" से उधार ले आया । ये दस कंप्यूटर भी एक महीने में ही फुल हो गए । फिर से 10, कंप्यूटर के लिए फर्नीचर बनवाया और फिर से दस कंप्यूटर उधार लाया PG कम्प्यूटर से, पहले की उधारी चुकता करके । इस तरह से एडमिशन की इनक्वायरी लगातार आती गई, मैं कंप्यूटर बढ़ाता गया और 50 कंप्यूटर की लैब बना दिया, थ्योरी के लिए 2 रूम फिर से ले लिया । धीरे धीरे करके कुल 12 कर्मचारी हो गए, जिसमे एक चौकीदार को बच्चो के सायकल की रखवाली करते थे, लाखो में फीस आने लगी और यह क्रम 2012 तक यथावत चलता रहा । इस दौरान एक मारुति वैन ले लिया स्टूडेंट्स को लाने, ले जाने ले लिए, अपने लिए अलग से कार खरीद लिया, श्री मती जी को आने जाने के लिए स्कूटी खरीद लिया । बच्चो को पढ़ाई चलती रही । बेटे को पुणे से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करवा दिया । 
कुल मिलाकर बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा था । सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था । 
9 सितंबर 2013 को मेरे जीवन में फिर एक टर्निंग प्वाइंट आया जो लाखो का नुकसान कर दिया 😭😭😭😭😭 ।
(शेष अगले भाग में)
#NSB

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