सोमवार, 9 जनवरी 2012

!!आम्बेडकर का मंत्री पद से त्याग पत्र और कश्मीर विभाजन की मांग!!

आम्बेडकर का मंत्री पद से त्याग पत्र और कश्मीर विभाजन की मांग (तुतीय प्रहार)
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बाबा साहेब आम्बेडकर काश्मीर को भारत में रखने के पक्ष में नहीं थे. और फिर सामने आया आम्बेडकर का कुर्सी मोह.
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सन १९५१ में हिंदू-कोड-बिल के अंतर्गत आम्बेडकर ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया, जो नेहरू ने स्वीकार कर लिया.
... उसकेबाद आम्बेडकर ने त्याग पत्र देने के ४ कारण दर्शाये. जो इतिहासविदो और भारत की सामान्य जनता में आम्बेडकर के प्रति द्वेष का कारण बन गए. जो बाद में अखबारों में भी प्रकाशित हुए.
वह कारण कुछ इस प्रकार हे.
१. प्रधान मंत्री ने योजनाविभाग आम्बेडकर को देने का वादा किया था जिससे बाद में सरकार मुकर गई.
२. (महत्वपूर्ण कारण)- सरकार को कश्मीर- पाकिस्तान को सोप देना चाहिए.
३. विदेशनीति की जिम्मेदारी भी मुझे(आंबेडकर को) दी जाए.
४. हिंदू कोड बिल में मुस्लिमो को आरक्षित किया जाए अर्थात दंगे के वक्त सारा दोष हिन्दुओ का ही निकले.
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(पुस्तक (रघुनाथ सिंह और संजीव प्रसाद कृत) बोधिसत्व- तोडो सब बंधन पृष्ठ-१४९)
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यः बिल में दी गए ४ कारण दर्शाते हे की आम्बेडकर कितना लालची और संकीर्ण मानसिकता का था.
क्युकी वो अपना कुर्सी प्रेम तो नहीं ही छोड़ सकता था लेकिन साथ में कश्मीर पाकिस्तान को दिया जाए एसी उसकी स्पष्ट मांग थी. जो भारत के हित में ही नहीं वो काहेका महान?
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जागो दलितो जागो... अंध श्रद्धा से बहार आओ.

1 टिप्पणी:

  1. aapne apni murkhataka parichay diya hai. Is desme kuch aapjaise log honese is deshka sadiyose kafi nuksan zel raha hai. Murkha insan babasahab ke naam ko tu kya samaz sakega ?

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